पानी के मुद्दे पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का दखल से इंकार, दोनों राज्यों को सलाह
-जो हम दुश्मन देश के साथ कर रहे, वह आपस में नहीं होना चाहिए
केवल अपनेे लिए नहीं चाहिए 8500 क्यूसिक पानी 1,049 दिल्ली और 850 राजस्थान कोः हरियाणा
हरियाणा ले रहा अधिक पानी, बीबीएमबी ने नहीं की कोई कार्रवाई, आपात बैठकें बुलाईंः पंजाब
पंजाब सरकार बांध से पुलिस हटाए, पानी वितरण का निर्णय लागू किया जाना चाहिएः बीबीएमबी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब व हरियाणा में पानी को लेकर चल रहे टकराव में दखल देने से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने इतना जरूर कहा कि पंजाब पुलिस भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के काम में दखल नहीं देगी और हरियाणा पानी के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार से संपर्क करे। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि जो हम दुश्मन देश के साथ कर रहे हैं, वैसा राज्यों को आपस में नहीं करना चाहिए। इस टिप्पणी के साथ ही कोर्ट ने हरियाणा को पानी देने को लेकर याचिका का निपटारा कर दिया, हालांकि अभी विस्तृत आदेश आना बाकी है। यह याचिका बीबीएमबी ने दाखिल की थी जिसमें नंगल बांध और लोहंद नियंत्रण कक्ष जल विनियमन कार्यालयों में तैनात पंजाब पुलिस बलों को हटाने की मांग की गई थी।
इस विवाद पर केंद्र सरकार की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्यपाल जैन ने कोर्ट को बताया कि पानी के वितरण को लेकर बीबीएमबी का निर्णय लागू किया जाना चाहिए। बीबीएमबी एक संस्था है जो जल के प्रवाह को नियंत्रित करती है। यह जल का हिस्सा तय करती है। नंगल बांध पर पुलिस तैनात करने का कोई औचित्य नहीं है। पंजाब सरकार को पुलिस हटानी चाहिए और बीबीएमबी को कार्य करने देना चाहिए।
पंजाब ने अपनी स्वैच्छिक आवंटन प्रतिबद्धता को दोहराया और 8,500 क्यूसिक पानी देने के हरियाणा के अनुरोध को खारिज कर दिया। पंजाब की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गुरमिंदर सिंह गैरी ने बताया कि अतिरिक्त पानी की मांग आधारहीन है। गैरी ने कहा कि बीबीएमबी केवल 24 घंटे की सूचना देकर आपात बैठकें बुला रहा है, जबकि उसकी कार्य संचालन नियमावली के नियम 4 के तहत सात दिन पूर्व सूचना आवश्यक है। पंजाब ने जनवरी 2025 में ही आपत्ति दर्ज कर दी थी कि हरियाणा लगातार अधिक जल ले रहा है, फिर भी बीबीएमबी ने कोई कार्रवाई नहीं की।
कोर्ट रूम लाइव
बीबीएमबी : एक मई की सुबह पंजाब सरकार ने अपने पुलिस बल के साथ नंगल बांध और लोहंद नियंत्रण कक्ष जल विनियमन कार्यालयों के संचालन और विनियमन का नियंत्रण जबरन अपने हाथ में ले लिया और हरियाणा को पानी छोड़ने से रोका। 30 अप्रैल को हुई बैठक में बोर्ड ने हरियाणा को 8,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का फैसला किया था। इस पर पंजाब ने आपत्ति जताई।
पंजाब सरकार :
कानून और व्यवस्था राज्य का विषय है। खतरे की आशंका और बलों की तैनाती पर फैसला करना राज्य का विशेषाधिकार है। हरियाणा सरकार दलील दे रही है कि पश्चिमी यमुना नगर में मरम्मत के चलते पानी की किल्लत है, लेकिन मरम्मत का काम ताे 1 मई को पूरा हो चुका है।
बीबीएमबी : जहां तक सुरक्षा का सवाल है, हमारे पास अपना सुरक्षा निदेशक है। विवाद से पहले केवल 15 सुरक्षाकर्मी थे। अब भारत-पाक मुद्दे को देख यह संख्या बढ़कर 55 कर दी गई है।
केंद्र सरकार :
बीबीएमबी से पानी केवल हरियाणा ही नहीं, बल्कि राजस्थान और दिल्ली को भी जाता है। अगर किसी राज्य को हरियाणा को पानी छोड़ने के लिए बोर्ड द्वारा पारित प्रस्ताव से कोई समस्या है, तो उसे उचित कानूनी तरीकों से चुनौती दी जानी चाहिए। कोर्ट पंजाब सरकार को पुलिस बल हटाने का निर्देश दे सकता है।
हरियाणा सरकार : पंजाब पानी के वितरण का पूरी ताकत से विरोध कर रहा है। बांध की सुरक्षा की आड़ में ऐसा किया जा रहा है। 8500 क्यूसेक की मांग सिर्फ हरियाणा के लिए नहीं बल्कि दिल्ली और राजस्थान के लिए भी है। दिल्ली को 1,049 और राजस्थान को 850 क्यूसेक पानी जाएगा।
हाईकोर्ट : हमने देखा है कि संवेदनशील स्थानों पर अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जाती है।