भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) हरियाणा, पंजाब और राजस्थान को डिमांड के अनुसार पानी देने को तैयार हो गया है। बीते 15 मई को बीबीएमबी मुख्यालय में हुई तकनीकी कमेटी की बैठक में 21 से 31 मई तक हरियाणा ने 10,300 क्यूसेक, पंजाब ने 17 हजार और राजस्थान ने 12,400 क्यूसेक पानी की मांग रखी थी। बैठक में पंजाब ने हरियाणा की मांग का विरोध किया था। लेकिन अब जो जानकारी सामने आई है उसके अनुसार बीबीएमबी ने फैसला लिया है कि हरियाणा, पंजाब और राजस्थान ने 10 दिनों के लिए पानी की जो मांग रखी थी, उसे पूरा किया जाएगा। यानी पंजाब के विरोध के बाद भी अब हरियाणा को 10,300 क्यूसेक पानी मिलेगा।
पंजाब सरकार ने इस बैठक में 17,000 क्यूसेक पानी की मांग की थी। तय अनुसार पंजाब को हरीके से 7,000 क्यूसेक और रोपड़ से 10,000 क्यूसेक पानी मिलेगा। राजस्थान को 12,400 क्यूसेक और हरियाणा को 10,300 क्यूसेक पानी देने की मंजूरी दी गई है। माना जा रहा है कि पंजाब सरकार के सख्त रुख के बाद बोर्ड ने निष्पक्ष रवैया अपनाया है।
हालांकि भाखड़ा नहर के माध्यम से चलने वाले पानी को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। बोर्ड ने यह शर्त भी जोड़ दी है कि पानी नहर की सुरक्षित क्षमता के अनुसार ही छोड़ा जाएगा। भाखड़ा नहर की डिजाइन क्षमता 12,500 क्यूसेक है, जबकि अब तक इसमें अधिकतम 11,200 क्यूसेक पानी ही छोड़ा जाता रहा है। बीबीएमबी ने नहर के जरिए पंजाब और हरियाणा को कुल 13,300 क्यूसेक पानी देने का निर्णय किया है, जो नहर की क्षमता से अधिक है।
31 मई को फिर बुलाई गई है बैठक
पंजाब पहले ही 15 मई की बैठक में कह चुका है कि भाखड़ा नहर के किनारे कमजोर हो चुके हैं और उसकी मरम्मत की जरूरत है। इसलिए नहर की हालत को देखते हुए ही पानी छोड़ा जाए। बीबीएमबी की अगली बैठक 31 मई को संभावित है, जिसमें जून महीने के लिए पानी की मांग को लेकर फैसला होगा।
उधर, पंजाब ने बीबीएमबी से जो अतिरिक्त पानी की मांग की थी, उस पर बीबीएमबी ने कोई फैसला नहीं लिया है। बीबीएमबी ने 15 मई की बैठक में पोंग डैम की तीसरी सुरंग की मरम्मत फिलहाल टालने का निर्णय लिया है। पंजाब ने धान की बुआई के लिए 35 प्रतिशत अधिक यानी 9 हजार क्यूसेक अतिरिक्त पानी की मांग रखी थी, लेकिन इस पर कोई फैसला नहीं हो पाया है।