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Chandigarh-Haryana News: 750 करोड़ के बजट से मजबूत होगा पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर, जून से एटीएस की शुरुआत

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- पांच महीनों में 70 मुठभेड़, तीन पुलिसकर्मी भी गोली लगने से घायल, एक बदमाश की मौत


- पुलिस मुख्यालय में डीजीपी अजय सिंघल ने की प्रेसवार्ता

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने कहा कि पुलिस विभाग अगले दो वर्षों में अपने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर 750 करोड़ रुपये खर्च करेगा। साथ ही प्रदेश में कानून व्यवस्था मजबूत करने और आतंकवाद से जुड़े खतरों से निपटने के लिए जून से एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) की शुरुआत कर दी जाएगी। सिंघल पंचकूला स्थित पुलिस मुख्यालय में प्रेसवार्ता में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में पुलिस लाइन, थाने, चौकियां, पुलिस पोस्ट और पुलिस बूथों का निर्माण एवं आधुनिकीकरण किया जाएगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इसके लिए विशेष बजट का प्रावधान किया है। एटीएस का नेतृत्व पुलिस महानिरीक्षक स्तर का अधिकारी करेगा जबकि चार पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारियों को इसमें जिम्मेदारी दी जाएगी। गुरुग्राम व पंचकूला में एसपी स्तर के अधिकारी नेतृत्व करेंगे। एटीएस गठन से जुड़ी छोटी तकनीकी आपत्तियां जल्द दूर कर ली जाएंगी।
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5 माह में 70 मुठभेड़, 3 पुलिसकर्मी भी घायल

डीजीपी अजय सिंघल ने कहा कि पिछले पांच महीनों में प्रदेश में 70 मुठभेड़ हुई हैं। इस दौरान तीन पुलिसकर्मियों को भी गोली लगी हालांकि बुलेटप्रूफ जैकेट के कारण उनकी जान बच गई। गुरुग्राम में हुई एक मुठभेड़ में एक आरोपी की मौत भी हुई है। हर बार पैर पर गोली लगने के सवाल पर डीजीपी ने कहा कि हर मुठभेड़ की परिस्थितियां अलग होती हैं और पुलिस हालात के अनुसार कार्रवाई करती है।

दुष्यंत मामले में बोले- रिपोर्ट अदालत में जमा करवा चुके
पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के मोबाइल नंबर ब्लॉक किए जाने के आरोपों पर डीजीपी ने कहा कि इस मामले में वह पहले ही स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं और इसे सार्वजनिक नहीं करना चाहते। हिसार पुलिस विवाद पुराना मामला है। इसकी विस्तृत जांच रिपोर्ट अदालत में जमा कराई जा चुकी है।
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डीजीपी ने बताया अपराध के आंकड़े बढ़ने का कारण
प्रदेश में अपराध बढ़ने के सवाल पर डीजीपी ने कहा कि हरियाणा में बिजली चोरी की करीब 40 हजार एफआईआर हर साल दर्ज होती हैं। गुमशुदगी के मामलों में भी एफआईआर दर्ज की जाती है जबकि कई राज्यों में केवल रोजनामचा में ही एंट्री होती है। इसी वजह से राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो में प्रदेश का अपराध का आंकड़ा ज्यादा दिखाई देता है।
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