सरकार की ओर से स्वीकृत एमटीपी सेंटर या क्लीनिक में दवाइयां बेचने का प्रावधान है। हाल ही में सरकार ने एमटीपी किट के रिटेलरों को भी सिर्फ स्वीकृत सेंटरों में किट देने के निर्देश दिए हैं। कई जिलों की सीमाएं पड़ोसी राज्यों से जुड़ी होने के कारण एमटीपी किट हरियाणा में आसानी से पहुंच जाती हैं।
हरियाणा में गिरते लिंगानुपात को रोकने के लिए प्रदेश सरकार अब अवैध रूप से गर्भपात की गोलियां यानी एमटीपी (मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी) किट बेचने वालों पर शिकंजा कसने जा रही है। सरकार अवैध रूप से एमटीपी किट की बिक्री को संज्ञेय अपराध की श्रेणी में डालने की तैयारी में है। इससे आरोपियों को पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकेगी। कम से कम तीन साल की सजा होगी।
अभी सरकार की ओर से स्वीकृत एमटीपी सेंटर या क्लीनिक में दवाइयां बेचने का प्रावधान है। हाल ही में सरकार ने एमटीपी किट के रिटेलरों को भी सिर्फ स्वीकृत सेंटरों में किट देने के निर्देश दिए हैं। कई जिलों की सीमाएं पड़ोसी राज्यों से जुड़ी होने के कारण एमटीपी किट हरियाणा में आसानी से पहुंच जाती हैं।
एमटीपी अधिनियम के तहत एमटीपी किट को बेचना तब तक अपराध नहीं माना जाता जब तक यह साबित न हो जाए कि बेची गई एमटीपी किट से ही गर्भपात हुआ है। एमटीपी अधिनियम के तहत गर्भपात करना जुर्म माना गया है। ड्रग एंड काॅस्मेटिक्स एक्ट में भी एमटीपी किट की बिक्री के लिए दंड का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं है, हालांकि बिना वैध पर्ची के बिक्री पर भी मामूली सजा व जुर्माने का प्रावधान है। इन वजह से सरकार कानून में संशोधन करने जा रही है।
पिछले दिनों फर्जी ग्राहक बनाकर कई एमटीपी किट विक्रेताओं को गिरफ्तार भी किया गया है, लेकिन उन्हें जमानत मिलती रही क्योंकि कानून नरम है। इसलिए सरकार अवैध रूप से एमटीपी किट बेचने को संज्ञेय अपराध बनाने के लिए मौजूदा प्रावधान में संशोधन करेगी।
स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल के निर्देश पर यह प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। पिछले दिनों राजपाल के नेतृत्व में स्पेशल टास्क फोर्स की बैठक हुई थी, जिसमें कई फैसले लिए गए थे।
ऑनलाइन किट बेची, पुलिस सुबूत नहीं पेश कर पाई
पिछले दिनों गुरुग्राम के ड्रग कंट्रोलर की शिकायत पर पुलिस ने ऑनलाइन एमटीपी किट विक्रेता को दिल्ली से गिरफ्तार किया था। ड्रग कंट्रोल ने ऑनलाइन ऑर्डर दिया और उनके बताए पते पर किट पहुंच गई। उनकी शिकायत पर विक्रेता के खिलाफ 11 फरवरी को बीएनएस की धारा 3 5, 12 (5), 61 (2), एमटीपी अधिनियम की धारा 3, 4, 5 व ड्रग एंड काॅस्मेटिक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया गया, पर उसे जमानत मिल गई।
अदालत में अपने आदेश में कहा कि जांच अधिकारी एक भी ऐसी महिला को पेश नहीं कर सके जिसने कथित तौर पर एमटीपी किट का इस्तेमाल किया हो या कथित तौर पर बेची गई एमटीपी किट का इस्तेमाल करके गर्भावस्था को समाप्त किया हो। इसी तरह से अन्य आरोपियों को अदालत से जमानत मिल जाती है। चिकित्सा व पुलिस अधिकारियों के लिए अवैध रूप से बेची गई किट का इस्तेमाल गर्भपात में किए जाने को अदालत में साबित करना आसान नहीं होता।
दो महीने में 28 छापे, 17 एफआईआर, 13 गिरफ्तार
सरकार की ओर से ऑनलाइन व अनधिकृत एमटीपी किट बेचने वालों के खिलाफ दो महीने में 28 जगह दबिश दी गई। 17 एफआईआर दर्ज की गईं। चार केमिस्ट शॉप संचालकों के लाइसेंस रद्द किए गए। 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया। 300 से ज्यादा एमटीपी केंद्रों का पंजीकरण रद्द किया गया। ये एमटीपी सेंटर गर्भपात के आंकड़े व स्त्री रोग विशेषज्ञों के आंकड़े बताने में विफल रहे थे। 23 एमटीपी सेंटरों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
उल्लेखनीय है कि हरियाणा में पिछले कुछ सालों से लिंगानुपात गिरता रहा है। 2019 में राज्य का लिंगानुपात 923 पहुंच गया था। वहीं, 2024 में 910 दर्ज किया गया था।