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Chandigarh-Haryana News: अब गांवों की शामलात जमीन से निजी परियोजनाओं को मिल सकेंगे रास्ते

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निजी परियोजनाओं के लिए बदले नियम, पंचायत की सहमति से मिलेगा रास्ता
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश सरकार ने गांवों में विकास परियोजनाओं का रास्ता आसान करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य में निजी परियोजनाओं को जरूरत पड़ने पर गांव की शामलात देह जमीन से रास्ता दिया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि इससे औद्योगिक, आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं में तेजी आएगी और गांव के लोगों के अधिकार भी सुरक्षित रहेंगे। विकास एवं पंचायत विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेन्द्र कुमार ने हरियाणा ग्राम साझा भूमि (विनियमन) संशोधन नियमों को अधिसूचित कर दिया है। नए नियम लागू होने के बाद अब उन परियोजनाओं को राहत मिलने की उम्मीद है जो वर्षों से रास्ते की समस्या के कारण अटकी हुई थीं।
दरअसल कई बार निजी कंपनियां या निवेशक किसी इलाके में परियोजना शुरू करना चाहते हैं मगर वहां तक पहुंचने के लिए सड़क या रास्ता नहीं होता। ऐसे मामलों में परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद भी काम अटक जाता था। अब सरकार ने नियमों में बदलाव करते हुए यह व्यवस्था बनाई है कि जरूरत पड़ने पर गांव की साझा जमीन से रास्ता उपलब्ध कराया जा सकेगा। हालांकि सरकार ने इसके साथ कुछ सख्त शर्तें भी रखी हैं ताकि गांव वालों के हित प्रभावित न हों। रास्ता तभी दिया जाएगा जब ग्राम पंचायत के कम से कम 75 प्रतिशत सदस्य और ग्राम सभा के 66 प्रतिशत सदस्य इसके पक्ष में सहमति देंगे। यानी बिना गांव की मंजूरी कोई फैसला नहीं लिया जा सकेगा। सबसे अहम बात यह है कि जिस जमीन से रास्ता दिया जाएगा उसका अधिकार पंचायत के पास ही रहेगा। इसका इस्तेमाल सिर्फ निजी कंपनी ही नहीं बल्कि गांव के आम लोग भी कर सकेंगे। इससे गांवों में सड़कों की सुविधा बढ़ने की संभावना है।
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सरकार ने निवेशकों के लिए भी शर्त तय की है। रास्ता लेने के बदले परियोजना संचालक को सरकार को परियोजना स्थल के कुल क्षेत्रफल का पांच प्रतिशत हिस्सा या रास्ते में इस्तेमाल हुई जमीन की चार गुना भूमि देनी होगी। इनमें से जो ज्यादा होगा वही देना पड़ेगा। यह जमीन पूरी तरह विकसित हालत में देनी होगी जहां बिजली-पानी और दूसरी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध हों। पहले शामलात देह की जमीन को न तो बेचा जा सकता था और न ही लंबे समय के लिए पट्टे पर दिया जा सकता था। इसी वजह से कई विकास परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ पाती थीं। सरकार का मानना है कि नए नियमों से निवेश बढ़ेगा, रोजगार के अवसर बनेंगे और गांवों में बुनियादी ढांचे का विकास भी तेजी से होगा।
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