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Chandigarh-Haryana News: लोकायुक्त में पंचायत, पुलिस व राजस्व से जुड़े भ्रष्टाचार की सबसे ज्यादा शिकायतें

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पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी लिखने से इन्कार व प्रभावशाली विरोधियों के इशारे पर शिकायतकर्ताओं के खिलाफ झूठे मामलों की शिकायत
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विधानसभा में पेश की गई लोकायुक्त कार्यालय की 2024-25 की रिपोर्ट, लोकायुक्त ने शक्तियां बढ़ाने की मांग की




आशीष वर्मा

चंडीगढ़। विधानसभा के मानसून सत्र के पटल में हरियाणा लोकायुक्त ने 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट के मुताबिक भ्रष्टाचार से संबंधित सबसे ज्यादा शिकायतें विकास एवं पंचायत विभाग, पुलिस और राजस्व विभाग से हैं। लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार से निपटने के लिए शक्तियां बढ़ाने की सिफारिश की है ताकि भ्रष्टाचार से निपटा जा सके। रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि 2022 में भी सिफारिशें की गई थीं मगर अभी तक उसे लागू नहीं किया गया है।
विधानसभा में पेश की गई रिपोर्ट के मुताबिक कुल 1085 शिकायतों में से 366 शिकायतें विकास एवं पंचायत विभाग से संबंधित हैं। इनमें सरपंचों के खिलाफ विकास कार्यों की राशि का गबन व अतिक्रमण संबंधी शिकायतें मिली हैं। पुलिस विभाग के अधिकारियों के खिलाफ 219 शिकायतें आई हैं जिसमें पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने से इन्कार करने, पक्षपातपूर्ण जांच, रिश्वत की मांग और प्रभावशाली विरोधियों के इशारे पर शिकायतकर्ताओं को झूठे मामलों में फंसाने से संबंधित हैं। वहीं, राजस्व विभाग के अधिकारियों के खिलाफ 81 शिकायतें मिली हैं। इन शिकायतों में भूमि अभिलेखों में अनियमितताएं, राजस्व कार्यालयों में अनधिकृत व्यक्तियों को काम करने की अनुमति देना, लोगों का उत्पीड़न, रिश्वत लेने के लिए जानबूझकर काम न करना, रिश्वत मांगने जैसी शिकायतें हैं। इन तीन विभागों के बाद शिक्षा विभाग व शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अधिकारियों से लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं।
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सिफारिशों के बावजूद 146 एटीआर जमा नहीं कराई गईं

लोकायुक्त ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि 2017 से 2024 तक 146 मामलों में कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) जमा नहीं कराई गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक शिकायत के निपटारे में काफी समय और ऊर्जा खर्च होती है। उसके बाद प्रासंगिक सिफारिशें दी जाती हैं ताकि भविष्य में अपराध का दोहराव न हो। ऐसी सिफारिशों पर ध्यान न देने और एटीआर जमा न करने से सारी मेहनत खराब हो जाती है। कार्रवाई रिपोर्ट सक्षम प्राधिकरण की ओर से जमा की जानी चाहिए। लोकायुक्त की कार्रवाई से 2024-25 में 23.31 लाख रुपये की गबन और दुरुपयोग की गई सार्वजनिक निधि की वसूली हुई है।
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अधिकार क्षेत्र नहीं, फिर भी खर्च कर दी राशि


लोकायुक्त ने अपनी रिपोर्ट में भ्रष्टाचार के कुछ मामलों का उल्लेख भी किया है। इसमें एक मामला नगर निगम गुरुग्राम से जुड़ा हुआ है। नगर निगम गुरुग्राम ने अरावली की पहाड़ियों में पौधरोपण पर 1.71 करोड़ रुपये खर्च किए जबकि यह क्षेत्र स्थानीय निकाय के अधिकार क्षेत्र में नहीं था। इसमें यह भी देखने को मिला है कि ठेकेदार के साथ कोई अनुबंध न होने के बावजूद मजदूरों के जलपान व भोजन में 59.57 लाख रुपये खर्च किए गए और ठेकेदार को भुगतान किया गया।
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