- प्रदेश में 247 अधिकारियों को अभी तक कारण बताओ नोटिस, फतेहाबाद में 3 अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
- हरियाणा कृषि व कल्याण विभाग के अनुसार, अकेले जींद में ही सर्वाधिक कार्रवाई और सबसे अधिक रेड एंट्री
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार पराली जलाने वालों पर अंकुश लगाने के लिए सख्त रुख अपना रही है लेकिन सरकार के इन प्रयासों पर भी जींद जिला प्रशासन पानी फेर रहा है। जींद में अभी तक सर्वाधिक मामले आग जलाने के चिह्नित किए गए हैं। पिछले वर्ष जींद में 15 सितंबर से 14 नवंबर के बीच केवल 112 मामले थे जबकि इस बार यही आंकड़ा 146 तक जा पहुंचा है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग भी जींद उपायुक्त को नोटिस थमा चुका है। हरियाणा कृषि व कल्याण विभाग का दावा है कि अभी तक लापरवाह अधिकारी-कर्मचारी हों या फिर पराली जलाने वाले किसान यहीं पर सर्वाधिक कार्रवाई की गई हैं।
कृषि व कल्याण विभाग के अनुसार जींद में 86 स्थानों पर जांच के बाद पराली जलाने की घटनाओं की पुष्टि की जा चुकी है और अभी तक 86 किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है और इतने ही किसानों की मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर रेड एंट्री भी दर्ज की जा चुकी है। जींद में 2 मामलों की जांच की गई तो वह दूसरे जिले की सीमा में पाए गए और 6 स्थानों पर दुर्घटनावश आग की घटनाएं मिलीं। जींद में पराली जलाने के मामले में लापरवाही बरतने के लिए अभी तक 79 नोडल अधिकारियों और सुपरवाइजरों को कारण बताओ नोटिस दिए गए हैं।
जींद में अभी भी 40 प्रतिशत धान की कटाई का काम शेष
विभागीय अधिकारियों के अनुसार जींद में कुल 3.32 लाख एकड़ बासमती धान का क्षेत्रफल है जिसमें से अभी भी करीब 2 लाख एकड़ धान की कटाई का कार्य हुआ है। अभी भी शेष 1.32 लाख एकड़ में धान की फसल की कटाई का कार्य जारी है यानी अभी भी करीब 39 प्रतिशत कटाई का कार्य जारी है। अब खेत खाली करने की जल्दबाजी में किसान आग लगा रहे हैं। गैर बासमती 1.42 लाख एकड़ में धान की कटाई का कार्य पूरा हो चुका है।