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Chandigarh-Haryana News: हर विभाग में कर्मचारी शिकायत निवारण समिति गठित करने के निर्देश

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हर शिकायत का निपटारा अधिकतम आठ सप्ताह में करना होगा
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अदालतों में कर्मचारियों के मुकदमों को कम करने का रखा लक्ष्य
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने कर्मचारियों से जुड़े विवादों और शिकायतों के निपटान पर संज्ञान लेते हुए हर विभाग में कर्मचारी शिकायत निवारण समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। अब कर्मचारियों को अदालत में जाने से पहले विभागीय शिकायत निवारण समिति के माध्यम से समाधान करवाना अनिवार्य होगा। हर शिकायत का निपटारा अधिकतम आठ सप्ताह में करना होगा। इसका मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों से संंबंधित मुकदमों को कम करना है।
इस संबंध में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, बोर्डों और निगमों के प्रबंध निदेशकों व विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों को दिशानिर्देश जारी किए। इसके मुताबिक सभी विभाग और संगठन अगले 15 दिनों में समिति का गठन करेंगे और इसकी रिपोर्ट प्रशासनिक न्याय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को भेजेंगे। उल्लेखनीय है कि हरियाणा सरकार ने हाल ही में लिटिगेशन पॉलिसी अधिसूचित की है।
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इसके मुताबिक निर्णय लेने में मनमानी और कर्मचारियों की शिकायतों की अनदेखी की वजह से अदालतों में बेवजह मुकदमे अदालत में दायर हो रहे हैं। इसलिए सभी विभागों को प्रभावी शिकायत निवारण समितियां गठित करनी होंगी, जिससे काफी संख्या में अनावश्यक मुकदमेबाजी को रोका जा सकेगा।



पहली विभाग और दूसरी जिला स्तर पर होगी कमेटी

शिकायत निवारण प्रणाली दो स्तरीय होगी। पहली श्रेणी में विभागाध्यक्ष की अध्यक्षता में मुख्यालय स्तर पर समिति गठित की जाएगी, जिनमें से एक एसएएस कैडर का और दूसरा मुख्यालय पर तैनात विधि अधिकारी होगा। दूसरी श्रेणी जिला स्तर पर होगी, जिसकी अध्यक्षता संबंधित उपायुक्त या सेवानिवृत्त जिला/अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश करेंगे। इस समिति में उपायुक्त की ओर से मनोनीत जिला स्तर पर मुख्य लेखाधिकारी, वरिष्ठ लेखाधिकारी या लेखाधिकारी व डिस्ट्रिक्ट अटार्नी, डिप्टी डिस्ट्रिक्ट अटार्नी या असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट अटार्नी भी शामिल होंगे।



शिकायत मिलने पर सात दिन में करनी होगी कार्रवाई



समिति को शिकायत या प्रतिवेदन प्राप्त होने के 7 दिनों में सुनवाई की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। समिति कर्मचारी को व्यक्तिगत रूप से प्रस्तुत होकर अपना पक्ष रखने का अवसर देगी। मौखिक और लिखित प्रतिवेदनों के आधार पर 30 दिनों में अपनी अनुशंसा संबंधित उच्च अधिकारी को भेजेगी। उच्च अधिकारियों को अनुशंसा प्राप्त होने के एक माह में इस पर अंतिम निर्णय लेना होगा। विभाग स्तरीय शिकायत निवारण प्रकोष्ठ या समिति की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष करेंगे।
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यह समिति मासिक बैठक कर मुख्यालय और क्षेत्रीय स्तर पर विभाग में मौजूद शिकायत निवारण प्रणाली की प्रभावशीलता की समीक्षा करेगी। हर विभाग को राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के परामर्श से एक समर्पित साफ्टवेयर विकसित करना होगा। इसके माध्यम से कर्मचारी अपनी शिकायतें ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे, अपनी शिकायत की स्थिति का पता लगा सकेंगे और निर्धारित समय-सीमा में जवाब प्राप्त कर सकेंगे। इससे शिकायतों के निपटान में न केवल पारदर्शिता आएगी बल्कि जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।
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