- मोटर वाहन अधिनियम एक कल्याणकारी कानून, पीड़ित परिवारों को न्यायोचित मुआवजा अदालतों का दायित्व
- मोटर दुर्घटना में मृत युवक के परिजनों को 4.78 लाख रुपये अतिरिक्त मुआवजा
चंडीगढ़। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि मृतक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस था, तो उसे केवल अकुशल श्रमिक मानकर आय तय कर मुआवजा निर्धारित करना सही नहीं है। इस आधार पर हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के आदेश में संशोधन करते हुए मुआवजे में 4,78,252 रुपये की बढ़ोतरी की है। हाईकोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि मोटर वाहन अधिनियम एक कल्याणकारी कानून है और पीड़ित परिवारों को न्यायोचित व यथोचित मुआवजा देना अदालतों का दायित्व है।
मामला 29 दिसंबर 2018 को हुई एक सड़क दुर्घटना से जुड़ा है जिसमें साकिर उर्फ मोहम्मद साकिर की मृत्यु हो गई थी। मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल, नूंह ने पांच अप्रैल 2024 को मृतक के परिजनों को 18,16,048 रुपये मुआवजा और सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया था। परिजनों ने इसे अपर्याप्त बताते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट ने रिकाॅर्ड का अवलोकन करते हुए पाया कि मृतक की उम्र दुर्घटना के समय 32 वर्ष थी और उसके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस मौजूद था। ऐसे में यह साबित नहीं हो सका कि वह नियमित रूप से किसी कंपनी में ड्राइवर के रूप में कार्यरत था, लेकिन केवल इस आधार पर उसे अकुशल श्रमिक मान लेना न्यायसंगत नहीं था।
अदालत ने कहा कि जिस पेशे के लिए मृतक के पास विधिवत योग्यता और लाइसेंस है, उसी के अनुरूप उसकी आय का आकलन किया जाना चाहिए। इसी आधार पर अदालत ने हरियाणा सरकार की ओर से अधिसूचित कुशल श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी को ध्यान में रखते हुए मृतक की मासिक आय 10,000 रुपये मानी। इस प्रकार पहले दिए गए 18,16,048 रुपये के मुकाबले परिजनों को 4,78,252 रुपये अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया गया। अदालत ने निर्देश दिए कि बढ़ी हुई राशि पर दावा याचिका दायर करने की तिथि से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देय होगा। बीमा कंपनी को आदेश की प्रति प्राप्त होने के दो माह के भीतर यह राशि ट्रिब्यूनल में जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं।