माननीय हैं इसीलिए कई साल से जांच लंबित है। अगर कोई आम आदमी होता तो छह महीने में जांच पूरी करके जेल भेज देते। लोग आपकी तरफ देख रहे हैं...। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मंगलवार को यह सख्त टिप्पणी वर्तमान व पूर्व सांसदों और विधायकों पर चल रहे आपराधिक मामलों की जांच लंबित होने पर की। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू व जस्टिस यशवीर सिंह राठौर की खंडपीठ ने हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ के जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को आदेश दिया है कि वे माननीयों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की स्थिति रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करें।
सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी हाईकोर्ट को कुछ समय पहले आदेश दिया था कि वे स्वत: संज्ञान लेकर माननीयों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की निगरानी करें। आदेश के अनुरूप पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने भी सुनवाई शुरू कर दी है। मंंगलवार को हरियाणा सरकार ने बताया कि प्रदेश में माननीयों पर कुल 13 आपराधिक मामले लंबित हैं। इनमें से एक एफआईआर वर्ष 2025 में दर्ज हुई थी, जिसमें चालान दाखिल किया जा चुका है। एक में कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल की जा चुकी है और 11 मामलों में अब तक जांच जारी है।
हरियाणा के डीजीपी को पेश होने को कहेंगे
कोर्ट ने धीमी जांच पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अब डीजीपी को वर्चुअली पेश होने को कहेंगे, ताकि वह स्वयं इसका स्पष्टीकरण दे सकें। सरकार की ओर से दलील दी गई कि कुछ मामले 5000 करोड़ रुपये के घोटाले से जुड़े हुए हैं। कोर्ट ने अब पंजाब व चंडीगढ़ को जवाब दाखिल करने के लिए दो दिन का समय दिया है।
हरियाणा में एक मामले की जांच 14 साल से चल रही
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने बताया था कि हरियाणा में कुल 16 आपराधिक मुकदमे वर्तमान या पूर्व सांसदों/विधायकों के खिलाफ लंबित हैं। एक मामला 2011 से, जबकि अन्य 2017, 2018 और 2019 से लंबित हैं। इस पर कोर्ट ने हरियाणा सरकार के गृह सचिव को निर्देश दिया था कि वे हलफनामा दायर कर स्पष्ट करें कि इन मामलों की जांच अब तक पूरी क्यों नहीं हुई।
पंजाब के कुल 28 मामले लंबित
पंजाब में भी माननीयों पर कुल 28 आपराधिक मामले लंबित हैं। इनमें से अधिकांश हाल के वर्षों 2023 और 2024 में दर्ज किए गए हैं। अदालत ने पंजाब के गृह सचिव से भी व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि जहां प्रारंभिक जांच रिपोर्ट खारिज हो गई थी, वहां अब तक ताजा रिपोर्ट दाखिल क्यों नहीं की गई।