तीन नए आपराधिक कानूनों भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम को लागू करने के मामले में हरियाणा पूरे देश में पहले स्थान पर आया है। राज्य को 100 में से 95.21 अंक मिले हैं।
पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने बताया कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री नायब सैनी के मार्गदर्शन में बेहतर योजना, गहन प्रशिक्षण और पुलिस अधिकारियों की मेहनत का नतीजा है। उन्होंने कहा कि ये कानून सिर्फ पुराने प्रावधानों की जगह लेने भर के लिए नहीं, बल्कि आधुनिक, तकनीक-आधारित और नागरिक-केंद्रित न्याय व्यवस्था की दिशा में बड़ा बदलाव हैं।
डीजीपी के अनुसार, राज्य की रणनीति चार स्तंभों पर टिकी रही- प्रशासनिक सुधार, कामकाज में बेहतरी, सूचना-संचार तकनीक का इस्तेमाल और इंटीग्रेटेड क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम के तहत तालमेल। हर जांच अधिकारी को नई कानूनी व्यवस्था की ट्रेनिंग देने के साथ आईओ मोबाइल ऐप, मोबाइल फोरेंसिक यूनिट, ई-साक्ष्य, इलेक्ट्रॉनिक समन, डिजिटल केस मैनेजमेंट और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी सुविधाएं दी गई हैं।
गंभीर अपराधों में फोरेंसिक जांच अब अनिवार्य कर दी गई है और जीरो एफआईआर, ई-एफआईआर, गवाह सुरक्षा तथा वीडियो लिंक गवाही जैसी सुविधाओं से न्याय व्यवस्था अधिक वैज्ञानिक और सुलभ बनी है।
सिंघल ने बताया कि डिजिटल पहलों से महज छह महीनों में 26 करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई है, जिसमें अकेले ई-समन सिस्टम से हजारों रीम कागज और करीब 27 लाख लीटर ईंधन की बचत शामिल है।
डीजीपी ने आगे कहा कि यह डिजिटल ढांचा भविष्य में पुलिसिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल की राह भी तैयार कर रहा है, जैसे सीसीटीवी फुटेज का एआई विश्लेषण और फिंगरप्रिंट मिलान। उन्होंने कहा कि नए कानूनों की असली सफलता पुलिस, अभियोजन पक्ष, फोरेंसिक विशेषज्ञों, न्यायपालिका और आम नागरिकों के आपसी तालमेल पर निर्भर करेगी।