अपनी जन्मभूमि से प्यार और लगाव किसे नहीं होता, फिर चाहे इंसान सात समंदर दूर जाकर भी क्यों न बस जाए। उसके दिल में अपने गांव और अपनों के लिए कुछ करने की ललक बनी रहती है।
इस ललक को पूरा करने में मदद करने के लिए हरियाणा सरकार आगे आई है। सरकार के जरिए एनआरआई अब अपने गांव को गोद लेंगे। वहां अस्पताल, स्कूल, तालाब और अन्य मूलभूत सुविधाओं की सूरत बदलेंगे।
हरियाणा मूल के कुछ एनआरआई ने कुछ माह पहले मुख्यमंत्री नायब सिंह से मिलकर कानूनी और भ्रष्टाचारमुक्त तरीके से अपने गांवों में विकास कार्य कराने की इच्छा जाहिर की थी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर हरियाणा विदेश सहयोग विभाग ने इसकी विस्तृत योजना तैयार की। वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और यूएस में रहने वाले तकरीबन 6-7 एनआरआई विदेश सहयोग विभाग के संपर्क में आकर अपने गांवों में विकास कार्य कराने की हामी भर चुके हैं।
पोर्टल विकसित, प्रमुख सचिव के दफ्तर से होगा कनेक्ट
विदेश सहयोग विभाग के अतिरिक्त प्रमुख सचिव अमित अग्रवाल के नेतृत्व में टीम एक पोर्टल भी विकसित कर चुकी है, जिसे जल्द लॉन्च किया जाएगा। इस पोर्टल को प्रमुख सचिव के दफ्तर से जोड़ा जाएगा। इस पोर्टल पर इच्छुक एनआरआई अपनी इच्छानुसार गांव में अस्पताल, स्कूल या अन्य व्यवस्थाओं को अपने स्तर पर बनवाने या अपग्रेड करने की जानकारी अपलोड कर सकेंगे। इसके बाद संबंधित विभाग के अधिकारी उस व्यवस्था की विस्तृत सूची और खर्च की जानकारी एनआरआई को दे देंगे। इस प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता रहेगी।
पोर्टल से एनआरआई हित में बड़ा बदलाव
विदेश सहयोग विभाग इस पोर्टल पर हरियाणा के एनआरआई की विस्तृत जानकारी भी अपडेट रखेगा। एनआरआई अपनी शिकायतों को पोर्टल पर दर्ज करवा सकेंगे, जिसका तत्काल निवारण कर उन्हें जानकारी भी दी जाएगी।
हरियाणा सरकार विदेश में रहने वाले हरियाणवियों को अपना ब्रांड एंबेसडर मानती है। एनआरआई का हमेशा से अपने प्रदेश के प्रति सहयोग रहा है। अब एनआरआई अपने गांवों को गोद ले सकेंगे। अस्पताल, स्कूल व अन्य मूलभूत सुविधाएं बढ़ा सकेंगे। इसके लिए सरकार के सहयोग से एक पारदर्शी प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
- पवन चौधरी, विदेश सहयोग विभाग के लिए मुख्यमंत्री के सलाहकार