बारिश से तरबतर करने वाला मानसून बुधवार को हरियाणा से विदा हो गया। 24 वर्षों में पहली बार मानसून की विदाई इतनी जल्दी हुई है। इससे पहले 2001 में 18 सितंबर को मानसून की हरियाणा से वापसी हुई थी। उसके बाद के वर्षों में मानसून की विदाई सितंबर के आखिरी दिनों व अक्तूबर के पहले या दूसरे हफ्ते में होती रही है।
इस बार का मानसून कई मायनों में विशेष रहा है। बीते 27 वर्षों में सबसे ज्यादा मानसून इस साल बरसा। इससे पहले 1998 में 698 मिलीमीटर बारिश सीजन में दर्ज की गई थी, जो सामान्य से 39.6 फीसदी ज्यादा थी। हरियाणा में सबसे ज्यादा अधिक बारिश फतेहाबाद में सामान्य से 121 फीसदी ज्यादा रिकॉर्ड हुई। जिले में 259 मिलीमीटर के मुकाबले 572.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। वहीं, महेंद्रगढ़ में सामान्य से 109 फीसदी, कुरुक्षेत्र में 87 फीसदी, झज्जर में 83 फीसदी, हिसार में 74 फीसदी और सिरसा में 67 फीसदी रिकॉर्ड बारिश दर्ज हुई।
साल मानसून
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डा. वीरेंद्र सिंह लाठर ने बताया, मानसून जल्दी जाने से की वजह अब फसलों को फायदा होगा। बादल व बारिश न होने से फसलों में कीड़े व बीमारी कम होगी। अब कई फसलें पक चुकी हैं या फिर पकने की अवस्था में हैं। बारिश से पोलन झड़ जाता है, जो अब नहीं झड़ेगा। इससे पूरा पोषण मिलेगा और बीज की बनावट अच्छी होगी।