हरियाणा में 30 वायु गुणवत्ता निगरानी सिस्टम छह महीने से पड़े हैं ठप
रख रखाव का ठेका समाप्त होने के बाद नया ठेका आवंटित नहीं हो पाया
सिर्फ गुरुग्राम का स्टेशन चल रहा, बोर्ड का दावा- एक महीने में स्टेशन चालू किए जाएंगे
आशीष वर्मा
चंडीगढ़। हरियाणा के 30 वायु गुणवत्ता निगरानी सिस्टम पिछले छह महीने से ठप पड़े हैं। इन सिस्टम के बंद होने से राज्य में वायु प्रदूषण के आंकड़े दर्ज नहीं हो पा रहे हैं। इनमें कुछ ऐसे स्टेशन हैं जो पिछले साल नवंबर में बंद हो गए थे। दरअसल इन सिस्टम के रख-रखाव वाली कंपनी का ठेका नवंबर 2024 व मार्च 2025 में समाप्त हो गया था। इसके बाद टेंडर लगाए गए मगर सिर्फ एक ही बोलीदाता के आने से उसका आवेदन स्वीकार नहीं किया गया। अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने फिर से टेंडर लगाए हैं। बोर्ड का दावा है कि अगले एक महीने के भीतर टेंडर आवंटित कर स्टेशनों को चालू कर दिया जाएगा।
हरियाणा में कुल 31 वायु गुणवत्ता निगरानी सिस्टम स्थापित हैं। इनमें से अभी सिर्फ गुरुग्राम का स्टेशन चल रहा है। बाकी स्टेशन ठप चल रहे हैं। इनमें से आधे स्टेशन नवंबर में बंद हो गए थे और आधे मार्च 2025 में ठप हो गए । मानसून की विदाई और पराली जलाने के मामले सामने आने के बाद इन निगरानी केंद्रों की महत्ता बढ़ जाती है। इस समय हवा में प्रदूषण की मात्रा बढ़ने लगती है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन व लोगों को मालूम होना चाहिए कि उनके इलाके में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) कितना है ताकि समय रहते उचित कदम उठाए जा सकें। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इसे लेकर गंभीरता नहीं दिखा रहा है। लगभग एक साल होने को है मगर इन स्टेशनों के रखरखाव के लिए कोई दूसरी कंपनी तय नहीं की जा सकी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव प्रदीप कुमार ने बताया कि स्टेशनों के लिए टेंडर लगा दिए गए हैं। एक महीने के भीतर टेंडर अलॉट कर स्टेशनों को चालू कर दिया जाएगा।
यहां स्टेशन पड़े हैं बंद
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक हरियाणा के करीब 21 शहरों से वायु गुणवत्ता के आंकड़े दर्ज नहीं किए जा रहे हैं। अंबाला, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, भिवानी, चरखी दादरी, धारूखेड़ा, फरीदाबाद, फतेहाबाद, हिसार, जींद, कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, मानेसर, नारनौल, पलवल, पंचकूला, पानीपत, रोहतक, सिरसा, सोनीपत और यमुनानगर के वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन बंद पड़े हैं।
सिस्टम ठप होने से बढ़ी दिक्कतें
वायु गुणवत्ता निगरानी सिस्टम के चालू नहीं होने से वायु गुणवत्ता के आंकड़े नहीं मिल पा रहे हैं। निगरानी के लिए आंकड़ों का होना जरूरी है। जब तक आंकड़े नहीं होंगे तब तक अधिकारी ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान के तहत प्रतिबंधों को लागू नहीं कर सकते हैं। रिसर्च व निगरानी के लिए पुराने डाटा पर ही निर्भर रहना पड़ेगा और अभी यह भी तय नहीं है कि दिवाली तक ये निगरानी सिस्टम चल पाएंगे या नहीं।