सभी विभागों को एलपीए दायर करने के निर्देश, जरूरत पड़ने पर फैसलों पर रोक लगाने की मांग भी की जाएगी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार कर्मचारियों के नियमितीकरण से जुड़े हाईकोर्ट के फैसलों को चुनौती देने की तैयारी कर रही है। मानव संसाधन विभाग ने सभी सरकारी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे संबंधित मामलों की जांच कर हाईकोर्ट में एलपीए (लेटर्स पेटेंट अपील) दायर करें। जरूरत पड़ने पर फैसलों पर रोक लगाने की मांग भी की जाएगी।
मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से जारी पत्र के मुताबिक सभी विभागों को बिना देरी कार्रवाई शुरू करने और इसकी रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। निर्देश प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडल आयुक्तों, उपायुक्तों, विश्वविद्यालयों और बोर्ड-निगमों के अधिकारियों को भेजे गए हैं। सरकार ने 12 मई 2026 को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के दीपक कुमार व अन्य बनाम हरियाणा राज्य मामले में दिए गए फैसले के खिलाफ अपील करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के 15 मई 2026 के फैसले को आधार बनाने को कहा गया है। दरअसल, नियमितीकरण से जुड़े मामलों में अदालत ने पहले कर्मचारियों को पुरानी नीतियों के तहत लाभ देने के निर्देश दिए थे। इनमें 1993, 1996, 2003 और 2011 की नियमितीकरण नीतियां शामिल थीं। फैसले में कुछ ऐसे कर्मचारियों को भी नियमित करने का निर्देश दिया गया था जिन्होंने 31 दिसंबर 2025 तक 10 साल से अधिक सेवा पूरी कर ली थी।
सरकार ने इन आदेशों को चुनौती दी थी। इसके बाद 15 मई 2026 को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि प्रत्येक कर्मचारी के मामले की अलग-अलग जांच की जाए। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के संबंधित फैसलों में तय कानूनी नियमों को ध्यान में रखने के निर्देश दिए गए। अदालत ने यह भी कहा था कि नियमितीकरण के मामलों में संबंधित अधिकारियों के स्पष्ट आदेश आने तक कर्मचारियों के काम करने की मौजूदा स्थिति बनी रहेगी। यह व्यवस्था सरकार के अंतिम फैसलों के अधीन होगी। मानव संसाधन विभाग ने सभी विभागों को कर्मचारियों की सेवा अवधि, सेवा रिकॉर्ड और उन पर लागू नियमितीकरण नीतियों की जांच करने को कहा है। इसके बाद कानूनी सलाह लेकर अपील दायर की जाएगी। जरूरत के अनुसार अदालत से फैसलों पर रोक लगाने की मांग भी की जा सकती है। यह कार्रवाई नियमितीकरण से जुड़े मामलों में दायर अवमानना याचिका ऋषि पाल बनाम अनुराग रस्तोगी आईएएस व अन्य के संदर्भ में भी की जा रही है। विभागों को सभी जरूरी दस्तावेज और कानूनी आधार तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार के इस कदम से नियमितीकरण से जुड़े मामलों में आगे कानूनी प्रक्रिया तेज हो सकती है। हालांकि अभी सभी कर्मचारियों का नियमितीकरण रद्द नहीं हुआ है। हर मामले में संबंधित रिकॉर्ड और नियमों के आधार पर अलग-अलग निर्णय लिया जाना है।