मंत्रिमंडल की बैठक में सोमवार को मेक इन हरियाणा समेत 10 नई औद्योगिक नीतियों को मंजूरी दी गई। नई औद्योगिक नीतियों के तहत सरकार ने दावा किया है कि इसके जरिये अगले पांच वर्षों में 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश आएगा, 10 लाख नए रोजगार पैदा होंगे और हरियाणा का निर्यात बढ़ेगा। नई नीतियों में उद्योगों के साथ आईटी, एआई, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, डेटा सेंटर, एग्री बिजनेस और ग्रीन इंडस्ट्री पर खास फोकस किया गया है। इन नीतियों की मंजूरी से सरकार की आठ बजट घोषणा भी पूरी हो गई है।
मेक इन हरियाणा औद्योगिक नीति 2026 अब राज्य की मुख्य औद्योगिक नीति होगी। यह पुरानी हरियाणा उद्यम और रोजगार नीति 2020 की जगह लेगी। नई नीति में पुरानी ए, बी, सी और डी ब्लॉक व्यवस्था खत्म कर नई श्रेणियां बनाई गई हैं। इससे राज्य के हर इलाके में उद्योग लगाने को बढ़ावा मिलेगा। जिन क्षेत्रों में उद्योगों की ज्यादा जरूरत है, वहां कंपनियों को ज्यादा सुविधा और प्रोत्साहन मिलेगा। सरकार का कहना है कि अब औद्योगिक लाभ केवल कुछ इलाकों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पूरे हरियाणा को इसका फायदा मिलेगा। नई नीति में उद्योग लगाने वाले निवेशकों को पूंजीगत सब्सिडी देने का प्रावधान किया गया है।
सरकार उद्योगों को 30 प्रतिशत से 70 प्रतिशत तक एसजीएसटी की प्रतिपूर्ति देगी। बड़ी कंपनियों को यह लाभ 7 साल, मेगा प्रोजेक्ट को 10 साल और अल्ट्रा मेगा प्रोजेक्ट को 12 साल तक मिलेगा। बड़ी इकाइयों को 5 से 20 प्रतिशत तक और प्राइम या फोकस क्षेत्रों में मेगा व अल्ट्रा मेगा परियोजनाओं को 30 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी मिलेगी। स्टाम्प ड्यूटी में भी 30 से 100 प्रतिशत तक छूट दी जाएगी।
मेक इन हरियाणा में ये किए गए प्रावधान
अब हरियाणा के स्थानीय कर्मचारियों को नौकरी देने वाली कंपनियों को प्रति कर्मचारी हर साल 1 लाख रुपये तक की सहायता 10 साल तक मिलेगी। पहले यह राशि 48 हजार रुपये थी।
महिलाओं, अनुसूचित जाति, दिव्यांगजन, अग्निवीर और पूर्व सैनिकों के लिए यह सहायता बढ़ाकर 1.20 लाख रुपये तक कर दी गई है।
हरियाणा कौशल रोजगार निगम पोर्टल के जरिए भर्ती करने वाली इकाइयों को 5 साल तक नियोक्ता और कर्मचारी दोनों के ईपीएफ योगदान का 100% रिफंड मिलेगा। सरकार ने निवेशकों को समय पर भुगतान देने की व्यवस्था भी की है। 1 अप्रैल 2026 से यदि भुगतान में देरी हुई तो 8 प्रतिशत सालाना ब्याज दिया जाएगा। प्रोत्साहन राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा 7 कार्य दिवस में और बाकी राशि 45 दिनों में जारी की जाएगी।
45 कार्य दिवस में भू उपयोग संबंधी मिलेगी मंजूरी
नई व्यवस्था में भूमि व्यवहार्यता प्रमाण पत्र के जरिए 45 कार्य दिवस में जमीन के मालिकाना हक, भू-उपयोग और जरूरी मंजूरियों की जानकारी दी जाएगी। सरकार ने निर्यात बढ़ाने के लिए विशेष प्रोत्साहन भी रखा है। इन नीतियों को अंतिम रूप देने से पहले मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दो दिन तक उद्योगपतियों और विभिन्न औद्योगिक संगठनों के साथ बैठकें कीं। इस दौरान 100 से ज्यादा सुझाव मिले, जिनमें से अधिकतर को नई नीतियों में शामिल किया गया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग बढ़ेंगे, बनेगा इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर
इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग नीति 2026 मंजूर।
आईएमटी सोहना में 500 एकड़ में बनेगा इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर।
कंपनियों को 200 करोड़ तक की मदद
हरियाणा में बने इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों को सरकारी खरीद में प्राथमिकता दी जाएगी।
20 प्रतिशत से 30 प्रतिशत तक की पूंजीगत सहायता दी जाएगी, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति यूनिट 200 करोड़ रुपये होगी।
50 प्रतिशत से 80 प्रतिशत तक की परिचालन सहायता भी दी जाएगी जिसकी अधिकतम सीमा प्रति वर्ष 20 करोड़ रुपये होगी। सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए भी एक अलग पॉलिसी तैयार की जा रही है।
मेडिकल डिवाइस सेक्टर में 10 हजार करोड़ का निवेश लाएगी सरकार
फार्मास्यूटिकल एवं मेडिकल डिवाइसेज विनिर्माण नीति को मिली मंजूरी। दवा और मेडिकल डिवाइस सेक्टर में 10 हजार करोड़ का निवेश लाएगी सरकार।
नीति में महिलाओं को रात की पाली में काम करने की अनुमति। इस सेक्टर की इकाइयों को अनिवार्य सेवाएं घोषित किया जाएगा और दवा फॉर्मूलेशन को फास्ट-ट्रैक मंजूरियां मिलेंगी।
योग्य यूनिट्स को 20 से 30 प्रतिशत तक की पूंजीगत सहायता मिलेगी (जो प्रति यूनिट अधिकतम 200 करोड़ रुपये तक हो सकती है) और 50 से 80 प्रतिशत तक की परिचालन सहायता मिलेगी (जो प्रति वर्ष अधिकतम 20 करोड़ रुपये तक हो सकती है)।
खिलौना एवं खेल उपकरण विनिर्माण नीति को मंजूरी।
स्मार्ट और ईको-फ्रेंडली खिलौना उद्योग में 5000 करोड़ के निवेश का खाका
युवाओं के लिए खुलेंगे 25,000 नौकरियों के रास्ते।
साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और गणित (स्टेम) पर आधारित स्मार्ट खिलौनों और हाई-वैल्यू स्पोर्ट्स सामान के निर्माण पर फोकस
एमएसएमई की भागीदारी बढ़ाने के लिए यूनिट्स को 30% तक की कैपिटल असिस्टेंस (अधिकतम 50 करोड़ रुपये) दी जाएगी।
पांच वर्षों के लिए सालाना 3 करोड़ रुपये तक की ऑपरेशनल मदद का प्रावधान।
ई-कचरे से ग्रीन जॉब्स पैदा करेगा हरियाणा
हरियाणा इलेक्ट्रॉनिक्स वेस्ट रीसाइक्लिंग पॉलिसी 2026 पास, पुराने गैजेट्स से बनेगा नई पीढ़ी के उपकरणों का कच्चा माल
रीसाइक्लिंग यूनिट्स को मिलेगी 25 करोड़ तक की पूंजीगत सहायता। हरियाणा में रजिस्टर्ड रीसाइक्लिंग यूनिट्स को सरकारी खरीद में प्राथमिकता मिलेगी।
कंपनियों को 25 करोड़ रुपये तक की पूंजी सहायता और 5 साल तक हर साल 2 करोड़ रुपये तक संचालन के लिए मदद दी जाएगी।