सरकारी योजनाओं व खर्च की समीक्षा करने वाली नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी), लोक लेखा समिति (पीएसी) और सार्वजनिक उपक्रम समिति (सीओपीयू) की ओर से सौंपी जाने वाली ऑडिट रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करने और उनका जवाब देने में देरी बरती जा रही है।
हरियाणा विधानसभा की समितियों ने इस बारे में सवाल उठाया और सरकार को इस संबंध में पत्र भेज गंभीर चिंता भी जताई है। लोक लेखा समिति की 91वीं रिपोर्ट के मुताबिक 1,653 सिफारिशें अभी लंबित हैं। इन पर कोई काम नहीं हुआ है।
वहीं, 71वीं सीओपीयू रिपोर्ट के मुताबिक 265 सिफारिशों पर अभी कोई काम नहीं हुआ है। अब वित्त विभाग ने सभी विभाग के प्रमुखों को बिना किसी देरी के ऑडिट पैराग्राफ का जवाब दें और इसका जल्द से जल्द निपटारा करें।
वित्त विभाग ने यह भी कहा है कि निर्देशों का पालन न करने से न केवल पीएसी/सीओपीयू रिपोर्ट की सिफारिशों/पैराग्राफों का बोझ बढ़ रहा है बल्कि काम में भी बाधा आ रही है। इससे सरकार को अनावश्यक रूप से शर्मिंदगी भी उठानी पड़ रही है। विभाग ने यह भी सवाल उठाया है कि जो जवाब भेजे भी जा रहे हैं, उनमें कईयों में तथ्यात्मक रूप से गलत जवाब हैं।
उल्लेखनीय है कि सीएजी, पीएसी व सीओपीयू की जिम्मेदारी है कि वह सरकारी व्यय की जांच करती है कि धन का इस्तेमाल कानूनी व वित्तीय मानदंडो के अनुसार किया जा रहा है या नहीं। खामियां मिलने पर समितियां सरकार की खामियों को उजागर करते हुए सिफारिशें भी देती हैं, ताकि भविष्य में सरकारी धन का गलत इस्तेमाल न किया जा सके।
क्या कहता है नियम
वित्त विभाग की ओर से सभी विभागों को भेजे गए अति महत्वपूर्ण पत्र में जानकारी दी गई है कि कोई भी विभाग शकधर समिति की सिफारिशें का पालन नहीं किया जा रहा। समिति ने सिफारिश की थी कि सभी ऑडिट पैरा के जवाब प्रशासनिक विभागों के स्तर पर तीन महीने के भीतर भेजे जाने चाहिए। समिति ने यह भी सिफारिश की थी कि ड्राफ्ट पैरा छह सप्ताह के भीतर प्रधान महालेखाकार (पीएजी) को भेजना होगा।
वित्तीय हेराफेरी की तत्काल होनी चाहिए जांच
वित्त विभाग ने निर्देश दिए हैं कि लोक लेखा समिति की ओर से वित्तीय हेराफेरी पर सवाल उठाए जाने पर तत्काल जांच करनी चाहिए। भविष्य में ऐसे मामलों न हो, इसके लिए भी तत्काल सिफारिशों को लागू कर कार्रवाई करनी चाहिए। सीएजी, पीएजी के ड्राफ्ट पैरा या अन्य जांच के माध्यम से जब भी अनियमितताओं का पता चलता है, तो विभागों को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। यदि समय पर कार्रवाई नहीं की जाती है, तो देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर कदम उठाए जाएंगे।