चंडीगढ़। हरियाणा सरकार किसान-केंद्रित डिजिटल पहल के तहत एक जनवरी से किसान रजिस्ट्री (एग्रीस्टैक) व एक फरवरी 2026 से डिजिटल क्रॉप सर्वे (डीसीएस) शुरू करने जा रही है। यह कदम राज्य के किसानों और उनकी फसलों का एकीकृत, सटीक और पारदर्शी डाटा आधार तैयार करने के लिए उठाया जा रहा है। यह अभियान देश के सबसे बड़े डिजिटल कृषि अभियानों में शामिल होगा।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्त आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने शुक्रवार को इसकी तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने बैठक में कहा कि विभाग लगभग 1.78 करोड़ भूमि खंडों पर कार्य करने के लिए पूरी तरह तैयार है। डॉ. मिश्रा ने स्पष्ट किया कि किसान रजिस्ट्री पोर्टल 17 दिसंबर तक पूरी तरह से क्रियात्मक होना चाहिए। इसमें भूमि सत्यापन, किसान पंजीकरण और रजिस्ट्रेशन जैसे तीन प्रमुख आवेदन शामिल हैं जिनका 20 दिसंबर तक सुरक्षा ऑडिट पूरा कर एप स्टोर पर उपलब्ध कराया जाना है।
इसके अलावा सर्वे ऑफ इंडिया को शेष गांवों की ज्योमेट्री मैपिंग 16 दिसंबर तक जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि किसान रजिस्ट्री सीधे पीएम किसान योजना से जुड़ी होगी इसलिए सभी किसानों का समय पर पंजीकरण सुनिश्चित करना जरूरी है। इसके लिए एक राज्य परियोजना प्रबंधन इकाई (एसपीएमयू) बनाई जाएगी और फील्ड स्टाफ जैसे पटवारी और कृषि पर्यवेक्षक किसानों की मदद के लिए समर्पित हेल्प डेस्क स्थापित करेंगे।
कार्य की प्रगति की साप्ताहिक समीक्षा उपायुक्त करेंगे जबकि भूमि अभिलेख निदेशक और कृषि निदेशक द्वैमासिक समीक्षा करेंगे। राज्य स्तर पर वित्त आयुक्त और कृषि विभाग के प्रधान सचिव मासिक समीक्षा करेंगे। इसके अलावा राजस्व विभाग और सर्वे ऑफ इंडिया के बीच संयुक्त बैठकें आयोजित कर तकनीकी और मानचित्र संबंधी मुद्दों का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।
डॉ. मिश्रा ने इसे डाटा-आधारित कृषि की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि डिजिटल कृषि अभियानों से न केवल फसल आकलन की सटीकता बढ़ेगी बल्कि सरकारी योजनाओं तक समय पर और पारदर्शी पहुंच सुनिश्चित होगी। इससे किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और हरियाणा कुशल, पारदर्शी और किसान-केंद्रित शासन के लिए राष्ट्रीय मॉडल बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।