-नौकरी से हटाने के शो कॉज नोटिस को हाईकोर्ट ने किया रद्द
-2019 में जारी हुआ था नोटिस, हाईकोर्ट ने दिया था यथास्थिति बनाए रखने का आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पांच सब-इंस्पेक्टरों को नौकरी से हटाने के लिए जारी शोकाज नोटिस को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि यदि वर्तमान में खाली पद नहीं हैं तो पद सृजित कर याचिकाकर्ताओं को सेवा में बनाए रखा जाए।
2018 में हरियाणा सरकार ने सब-इंस्पेक्टर (पुरुष) के पदों को भरने के लिए विज्ञापन जारी किया था। याचिकाकर्ताओं ने लिखित परीक्षा, शारीरिक परीक्षण आदि उत्तीर्ण कर मार्च 2019 में सेवा में आ गए। बाद में कुछ असफल उम्मीदवारों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जिसके बाद भर्ती बोर्ड ने परीक्षा परिणाम की समीक्षा की और कुछ याचिकाकर्ताओं को कम अंक दे दिए। इससे उनकी मेरिट नीचे चली गई और सरकार ने 16 दिसंबर 2021 को उन्हें नौकरी से निकालने हेतु शोकाॅज नोटिस जारी किया। हाईकोर्ट ने 22 दिसंबर 2021 को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया, जिसके चलते याचिकाकर्ता लगातार सेवा में बने रहे। अब तक वे छह वर्षों से अधिक समय से कार्यरत हैं। इस दौरान वे उम्र की अधिकतम सीमा पार कर चुके हैं, जिससे वे अन्य सरकारी नौकरियों के लिए अब पात्र नहीं रह गए हैं। याची पक्ष ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति में कोई धोखाधड़ी, मिलीभगत या गलत जानकारी नहीं थी। उन्होंने मेरिट के आधार पर चयन पाया था और पिछले छह वर्षों से ईमानदारी सेवा दे रहे हैं। नौकरी छूटने से न केवल उनका करियर, बल्कि उनका पारिवारिक और आर्थिक जीवन भी प्रभावित होगा। राज्य की ओर से कहा गया कि नियुक्ति अस्थायी थीं और परिणामों की समीक्षा के बाद उनकी मेरिट कम हो गया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अतिरिक्त पद सृजन करना कठिन होगा।
हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के दो अहम निर्णयों विकास प्रताप सिंह बनाम राहुल भगत और राजेश कुमार बनाम बिहार राज्य का हवाला देते हुए कहा कि निर्दोष नियुक्त अभ्यर्थियों को नियुक्ति रद्द करके दंडित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को या तो रिक्त पदों पर समायोजित किया जाए या फिर सुपरन्यूमरेरी पद बनाकर सेवा में बनाए रखा जाए।