अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) में आने वाले धोखाधड़ी यानी व्हाइट कॉलर क्राइम के मामलों में 23 फीसदी की वृद्धि हुई है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) रिपोर्ट-2023 के अनुसार राज्य में साल 2021 में 6173, 2022 में 6783 और 2023 में 7637 मुकदमे दर्ज हुए हैं। वहीं, प्रति एक लाख व्यक्ति के आधार पर अपराध की दर 25.2 फीसदी और पुलिस की तरफ से 39.1 फीसदी मामले में चार्जशीट किया गया है।
ईओडब्ल्यू में आने वाले मामलों में देशभर में हरियाणा 10वें स्थान पर है। हैरानी की बात है कि इस तरह के मामलों में चार्जशीट करने के दर में हरियाणा पुलिस 21वें स्थान पर यानी काफी पीछे है। पड़ोसी राज्य हिमाचल 39 फीसदी हरियाणा के बराबर तो पंजाब पुलिस 68 फीसदी चार्जशीट करने में काफी आगे है। चार्जशीट करने का राष्ट्रीय स्तर पर 54.5 हरियाणा से आगे है। साल 2023 में ईओडब्ल्यू में कुल 204973 मुकदमे दर्ज हुए हैं। हरियाणा में आर्थिक अपराध शाखा की जांच का दायरा मुख्य रूप से उन मामलों पर होता है जिनमें बड़े स्तर पर धोखाधड़ी, आर्थिक गड़बड़ी या फाइनेंशियल स्कैम शामिल है। इनमें बड़े स्तर की ठगी-धोखाधड़ी जैसे चिटफंड कंपनियां, मल्टी लेवल मार्केटिंग स्कीमें, फर्जी निवेश कंपनियां, बैंक धोखाधड़ी, भूमि/प्रॉपर्टी घोटाले, सरकारी धन की हेराफेरी कॉर्पोरेट या बड़ी कामर्शियल फर्म से जुड़ी धोखाधड़ी, एनआरआई से जुड़े आर्थिक अपराध और ऑनलाइन साइबर फाइनेंशियल फ्रॉड जैसे मामले शामिल होते हैं। हरियाणा आर्थिक अपराध शाखा को वही केस ट्रांसफर करने का प्रावधान रखा है जिनमें धोखाधड़ी की रकम कम से कम एक करोड़ या उससे अधिक हो। अगर धोखाधड़ी की राशि 50 लाख से ऊपर और केस जटिल प्रकृति का है तो भी केस ईओडब्ल्यू को सौंपा जा सकता है। आमतौर पर 50 लाख से कम राशि की धोखाधड़ी के मामलों की जांच सामान्य थाने या जिला पुलिस ही करती है।