चंडीगढ़। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के मुख्यालय के बाहर एफसीआई मजदूर विकास यूनियन के पदाधिकारियों ने प्रदर्शन किया। साथ ही सरकार और एफसीआई के अधिकारियों से न्याय मांगा।
बिहार से पहुंचे यूनियन के राष्ट्रीय प्रधान राजकुमार महतो ने कहा कि तीन श्रेणियों में विभाग में कर्मचारी तैनात हैं। दो श्रेणियों के श्रमिकों को सभी योजनाओं का लाभ दिया जाता है। मजदूरी भी अधिक है, लेकिन एनडब्ल्यूएनपी(नो वर्क-नो पेमेंट) के तहत तैनात कर्मचारियों से 350-400 तक बोरियां ढुलवाईं जाती हैं, लेकिन उन्हें केवल 541 रुपये प्रतिदिन मेहनताना दिया जाता है।
दूसरी श्रेणी के श्रमिक को 135 बोरियां ढोने पर मासिक एक लाख रुपये तक वेतन दिया जाता है। राज्य प्रधान महेंद्र सिंह ने कहा कि एनडब्ल्यूएनपी श्रेणी में शामिल श्रमिकों को जब काम नहीं मिलता तो उन्हें पैसा भी नहीं दिया जाता, इसलिए मासिक वेतन तय होना चाहिए। कई बार तो मासिक मजदूरी के रूप में केवल 2000-2500 रुपये तक ही मिलते हैं। इसके अलावा कई मांगों को लेकर मुख्यालय के अधिकारियों के साथ बैठक भी हुई ।