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...या खुद को सुधारो, या सलाखों के पीछे जाओ, सुरक्षा कोई तमाशा नहीं : डीजीपी

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-साल 2026 में आतंकी घटनाओं, नशा-मानव तस्करी, गैंगस्टर व कानून व्यवस्था पर लगाम के लिए पुलिस का रोडमैप तैयार
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-मधुबन में डीजीपी की अध्यक्षता में अपराध नियंत्रण रणनीति पर बैठक हुई, कहा-गलत तरीके से सुरक्षा लेने वालों से रिकवरी होगी

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ओपी सिंह ने कहा कि प्रदेश में अपराध करने वालों या खुद को सुधारो या सलाखों के पीछे जाओ और पुलिस सुरक्षा कोई तमाशा नहीं है, खतरे की रिपोर्ट के आधार पर व्यक्ति को ही सुरक्षा मिलेगी। गलत तरीके से सुरक्षा लेने वालों से रिकवरी भी होगी। हरियाणा पुलिस अकादमी मधुबन में साल 2026 में आतंकी घटनाओं, नशा-मानव तस्करी, गैंगस्टर व कानून व्यवस्था पर लगाम के लिए पुलिस का रोडमैप तैयार किया गया है। डीजीपी की अध्यक्षता में हुई बैठक में सभी एडीजीपी, आईजी, पुलिस आयुक्त, डीआईजी व अन्य सभी भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी उपस्थित रहे।


बैठक में 2025 के दौरान सामने आई चुनौतियों, उपलब्धियों और अनुभवों की समीक्षा करते हुए 2026 के लिए अपराध नियंत्रण, खुफिया तंत्र, रिश्वतखोरी, एक्सटोर्शन, जन-संपर्क, प्रवर्तन रणनीति व नए साल की तैयारियों पर पर विचार-विमर्श किया गया। डीजीपी ने कहा कि समय की मांग के अनुरूप अब पुलिसिंग को और अधिक लक्ष्य को प्राप्त करने, प्रो-एक्टिव और जनविश्वास आधारित बनाना होगा। डीजीपी ने निर्देश दिए कि एनडीपीएस मामलों में संलिप्त अपराधियों की विस्तृत हिस्ट्रीशीट तैयार की जाए। उनकी अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों को फ्रीज करने की कार्रवाई की जाए। साथ ही नशा मुक्ति केंद्रों में चल रहे उपचार की नियमित समीक्षा कर यह जानकारी ली जाए कि कितने लोग सफलतापूर्वक नशे से बाहर आए हैं। डीजीपी ने कुछ लोगों की सुरक्षा हटाने के सवाल पर कहा कि शौकिया पुलिस पीछे लगाने का खेल बंद होना चाहिए। डीजीपी ने बताया कि पानीपत से एक तस्वीर सामन आई कि एक व्यक्ति चार गनमैन मिलने के बाद मिलने वालों को बुलाने लगा बुक्के दे रहे और दोनों गनमैन फोटो खिंचवा रहे थे। फोटो उजागर होने पर चारों गनमैन को निलंबित करने के निर्देश दिए।
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अब कुख्यातों की निगरानी खुद एसपी करेंगे
डीजीपी ने निर्देश दिए कि जमानत पर जेल से बाहर चल रहे अधिक आपराधिक मामलों के अपराधियों की निगरानी रखी जाए। किसी आरोपी के दोबारा अपराध में लिप्त होने की आशंका हो तो उसकी जमानत निरस्त कराने की ठोस कार्रवाई की जाए। कुख्यात अपराधियों की व्यक्तिगत निगरानी स्वयं जिला पुलिस अधीक्षक स्तर पर होगी। नए वर्ष में सभी अधिकारियों को पहले से बेहतर प्रदर्शन करना होगा। बैठक में आतंक से संबंधित घटनाओं की समीक्षा की गई और उन्हें ट्रैस करने पर संतोष व्यक्त किया है। डीजीपी ने निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसी किसी भी चुनौती से निपटने के लिए अन्य केंद्रीय एवं जांच एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। ऑपरेशन ट्रैकडाउन व हॉटस्पॉट को लगातार जारी रखने का फैसला लिया गया है। बच्चों और युवाओं को नशा, जुआ, अवैध गतिविधियों या आपराधिक रास्ते पर लेकर जाने वाले तत्वों पर पुलिस नजर रखे और एक्शन लेने के निर्देश दिए। डीजीपी ने निर्देश दिए कि जिला पुलिस स्तर पर भी साइबर अपराध नियंत्रण को मजबूत किया जाए ताकि डिजिटल अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
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