चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी वरिष्ठ नागरिक को पहले ही दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत भरण-पोषण मिल चुका है तो वह मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटिजंस एक्ट-2007 के तहत राशि बढ़ाने की मांग नहीं कर सकता।
अदालत ने कहा कि कानून दोहरे भरण-पोषण या अलग-अलग मंचों से परस्पर विरोधी आदेशों की अनुमति नहीं देता। न्यायमूर्ति कुलदीप तिवारी की एकलपीठ ने 80 वर्षीय याचिकाकर्ता की याचिका का निपटारा करते हुए यह टिप्पणी की। याचिकाकर्ता ने मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल के 6 जनवरी 2015 व हिसार डिविजन अपीलीय प्राधिकारी के 5 अगस्त व 30 सितंबर के आदेशों को चुनौती दी थी। मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल ने उसे केवल 400 रुपये प्रतिमाह किराया देने का आदेश दिया था।
याचिकाकर्ता का कहना था कि वह मजदूरी कर जीवनयापन करता व स्वयं अर्जित मकान में रहता था लेकिन बेटों ने पत्नी के साथ मिलकर उसे घर से निकाल दिया। उसने बेटों के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 125 के तहत याचिका दायर की थी जिसमें उसे 3,000 रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण दिया गया था। ब्यूरो