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Chandigarh-Haryana News: निजी बिजली कंपनी को लाइसेंस देने से पहले रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग

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बिजली कर्मचारियों ने इस मामले में विधानसभा या मंत्रिमंडल में चर्चा करने का मामला उठाया
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कहा- इस पर गंभीरता से विचार नहीं हुआ तो बिजली कमी व इंजीनियर प्रदेशव्यापी आंदोलन करेंगे
अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। गुरुग्राम-नूंह की बिजली वितरण की कमान निजी कंपनी को देने के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने की प्रक्रिया पर अब बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले का विरोध कर रहे हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर्स संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने सरकार से लाइसेंस देने से पहले विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक करने और पूरे मामले पर विधानसभा या मंत्रिमंडल में चर्चा कराने की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी कि इस मांग पर गंभीरता से विचार नहीं हुआ तो बिजली कर्मचारी और इंजीनियर प्रदेशव्यापी आंदोलन करेंगे।


मोर्चा के प्रवक्ता देवेंद्र हुड्डा ने कहा कि पूर्व आईएएस अधिकारी आलोक निगम की अध्यक्षता में गठित विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक होने से सभी हितधारकों और आम लोगों को अपनी आपत्तियां और सुझाव देने का अवसर मिलेगा। महज एक वर्ष पुरानी इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को बिजली वितरण और आधारभूत ढांचे के पर्याप्त अनुभव के बिना लाइसेंस देने की प्रक्रिया में तेजी समझ से परे है।
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मोर्चा ने राज्य बिजली नियामक आयोग के अध्यक्ष का पद खाली होने के दौरान इतने महत्वपूर्ण मामले में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का दावा है कि प्रस्तावित कंपनी की प्राथमिकता अधिक राजस्व वाले औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं वाले गुरुग्राम और नूंह क्षेत्रों पर है। ग्रामीण, कृषि और कम आय वाले घरेलू उपभोक्ताओं को लेकर उसकी प्राथमिकता स्पष्ट नहीं है।
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मोर्चा ने इसे चुनिंदा उपभोक्ता चयन बताते हुए कहा कि यदि अधिक राजस्व देने वाले उपभोक्ता निजी कंपनी के पास चले गए तो सरकारी बिजली वितरण निगमों की आय पर असर पड़ेगा। इससे क्रॉस सब्सिडी की व्यवस्था कमजोर होने और किसानों, ग्रामीण तथा घरेलू उपभोक्ताओं पर भविष्य में बोझ बढ़ने की आशंका है। मोर्चा ने बिजली अधिनियम की धारा 43 के तहत सभी उपभोक्ताओं को बिजली उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी का हवाला देते हुए निजी कंपनी के चरणबद्ध विस्तार और सीमित उपभोक्ता हिस्सेदारी के लक्ष्य पर भी आपत्ति जताई।
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