विभागीय मंजूरी मिलने में देरी व भूमि विवादों के कारण देरी से पूरी हो रहीं केंद्रीय परियोजनाएं, लागत 11 करोड़ बढ़ी
कुलदीप शुक्ला
चंडीगढ़।
समय पर काम पूरा करना कितना जरूरी है यह हरियाणा चल रही कुछ केंद्रीय परियोजनाओं की बढ़ती लगात राशि देख कर पता चलता है। हरियाणा में केंद्र सरकार की 29 परियोजनाओं के लिए अलग-अलग समय पर कुल 67,288 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली थी। अधिकारियों की लापरवाही के चलते इन परियोजनाओं की लागत 11 हजार (10,795) करोड़ रुपये बढ़कर 78,084 करोड़ रुपये पहुंच गई है। ज्यादातर परियोजनाओं में विभागीय मंजूरी देरी से मिलने या भूमि विवाद के कारण लागत अधिक हो गई। इनमें राष्ट्रीय राजमार्ग और पेट्रोलियम मंत्रालय से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। यह रिपोर्ट केंद्र सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने जारी की है।
पेट्रोलियम मंत्रालय की तीन परियोजनाएं हरियाणा में चल रही हैं। इसमें एक में पानीपत रिफाइनरी का क्षमता 15 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़ाकर 25 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष की जानी है। फरवरी 2021 में इसे मंजूरी मिली थी और 34,627 करोड़ रुपये से इस काम को अक्तूबर 2023 तक पूरा करना था। अब तक 21,454.90 करोड़ खर्च हो चुके हैं और 87.6 फीसदी काम पूरा हुआ है। अब इसकी तिथि बढ़कर एक दिसंबर 2025 और लागत 38,231 करोड़ रुपये हो गई।
फरीदाबाद में पेट्रोलियम उत्पादों पर शोध के लिए अनुसंधान एवं विकास केंद्र बनाने की जून 2019 में मंजूरी मिली थी। तब इसकी लागत 34,627 करोड़ रुपये थी। अभी तक 21,454 करोड़ खर्च हो चुके हैं और 63 फीसदी काम हुआ है। अब तिथि बढ़कर एक मार्च 2026 हो गई और लागत 38,231 करोड़ रुपये हो गई है। पानीपत में 1,459 करोड़ से इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड का पॉली ब्यूटाडीन रबर (पीबीआर) प्लांट मार्च 2022 में मंजूर हुआ था। इसे मार्च 2025 तक पूरा किया जाना था। अभी तक 930 करोड़ रुपये से 68 फीसदी काम हुआ है। अब प्लांट का काम जून 2026 तक पूरा होगा और इसकी लागत बढ़कर 2,948 करोड़ रुपये हो गई है।
राष्ट्रीय राजमार्ग 352 पर 899 करोड़ रुपये से सोनीपत-गोहाना फोर लेन बनाने की मंजूरी जुलाई 2020 में मिली थी। यह काम जुलाई 2022 तक पूरा करना था। अब तक अभी तक 1,113 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं और 99 फीसदी काम पूरा हो चुका है। यह हाईवे 1,882 करोड़ रुपये से अगस्त 2025 तक पूरा होगा।