सीएम का जवाब- जो पोर्टल बंद करने की बात करते थे, जनता ने उनकी दुकानदारी बंद कर दी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। मानसून सत्र के दूसरे दिन हरियाणा में जलभराव को लेकर ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल को लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा आपस में भिड़ गए। हुड्डा ने कहा कि प्रदेशभर में जलभराव एक बड़ा मुद्दा है। सिर्फ पोर्टल खोलने के दावे से कुछ नहीं होता बल्कि सीएम को भी अपना जवाब देना चाहिए। इस पर सीएम सैनी ने कहा कि इसी पोर्टल के जरिए पारदर्शिता आई है। पहले तो मालूम ही नहीं चलता था कि भुगतान की राशि किसकी जेब में चली गई। विधानसभा चुनाव के दौरान विपक्ष ने पोर्टल के खिलाफ दुष्प्रचार किया और सत्ता में आने पर पोर्टल को बंद करने की बात कही थी, जनता ने उनकी दुकानदारी बंद करवा दी।
सत्र के रानियां से इनेलो विधायक अर्जुन चौटाला और डबवाली से इनेलो विधायक आदित्य देवीलाल ने रोहतक, भिवानी व हिसार में जलभराव की समस्या और फसलों के नुकसान पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव रखा। इसी तरह कांग्रेस विधायक मामन खान, मोहम्मद इलियास, आफताब अहमद और बलराम दांगी ने भी इस ओर ध्यान दिलाया।
इस पर सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी अपना जवाब पेश कर रहीं थी। इसी को आगे बढ़ाते हुए सीएम सैनी ने कहा कि विपक्ष लगातार पोर्टल को बदनाम करने की कोशिश करता रहा है जबकि इन्हीं पोर्टल से किसानों समेत आम जनता सुरक्षित है। कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अब पोर्टल के माध्यम से सीधे लोगों के घर तक पहुंच रहा है। इस पर भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि उन्होंने यह नहीं कहा कि पोर्टल बंद करवा देंगे, ये जरूर कहा कि जो जरूरी पोर्टल नहीं, उन्हें बंद करवा दिया जाएगा। सीएम जवाब दें कि सरकार कब तक पूरे नुकसान का विशेष गिरदावरी करवाकर मुआवजा दे रही है?
सीएम सैनी ने कहा कि सरकार ने क्षतिपूर्ति पोर्टल खोला है। जिन गांवों में पानी भरने से फसल खराब हुई है, वहां किसान पोर्टल पर अपने नुकसान की जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इसे संबंधित विभाग के अधिकारी द्वारा सत्यापित किया जाता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में किसानों को फसल खराब होने पर मात्र 1158 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया था जबकि वर्तमान सरकार अब तक 15,500 करोड़ रुपये का मुआवजा किसानों को जारी कर चुकी है। पिछले दिनों ही सरकार ने 78 करोड़ 50 लाख रुपये की मुआवजा राशि किसानों को जारी की है।
सरकार ने किसानों को मुआवजा देने के लिए नहीं किए प्रबंध: अर्जुन चौटाला
सदन में रानियां से इनेलो विधायक अर्जुन चौटाला ने कहा कि प्रदेश में कई दिनों तक बारिश के कारण रोहतक, हिसार और भिवानी समेत कई जिलों में किसानों की हजारों एकड़ फसलें बर्बाद हो गईं। यमुनानगर में करीब 500 एकड़, झज्जर में 12000 एकड़, कुरुक्षेत्र में 800 एकड़, फतेहाबाद में 1800 एकड़, हिसार में 7000 एकड़, भिवानी में 12000 एकड़, रोहतक में 19000 एकड़ और सिरसा में 2000 एकड़ फसलें लगभग बर्बाद हो गई हैं। अभी तक सरकार की तरफ से इन जिलों के किसानों के लिए कोई ऐसा प्रावधान नहीं किया गया है जिससे किसानों को मुआवजा मिल सके।
भारी वर्षा से प्रभावित 188 गांवों के किसानों के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल खुला: श्रुति
सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी ने सदन में बताया कि बाढ़ और भारी वर्षा से प्रभावित 188 गांवों के किसानों के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल 30 अगस्त 2025 तक खुला रहेगा। प्रभावित किसान इस पोर्टल पर फसल नुकसान की रिपोर्ट दर्ज कर सकते हैं। राजस्व अधिकारी विशेष गिरदावरी कर नुकसान का आकलन करेंगे और मानकों के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा।
हर वर्ष सीएम की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति की बैठक आयोजित होती है। इसमें तीन कैबिनेट मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर नदियों के तटबंधों को मजबूत करने, बाढ़ सुरक्षा योजनाओं और अन्य बाढ़ नियंत्रण कार्यों को मंजूरी दी जाती है। यह कार्य हरियाणा राज्य सूखा राहत एवं बाढ़ नियंत्रण बोर्ड द्वारा तकनीकी सलाहकार समिति की सिफारिश के बाद स्वीकृत किए जाते हैं।
15 मार्च 2025 को आयोजित 56वीं बैठक में 352 योजनाओं को 657.99 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी गई है। इनमें से अब तक 235 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जा चुकी है और 267 योजनाएं पूर्ण की जा चुकी हैं। प्रदेश में कुल 846 नाले हैं जिनमें से 671 नालों की सफाई की गई। वहीं, 1 जून 2025 से अब तक राज्य में औसत 342.8 एमएम वर्षा हुई है जबकि सामान्य तौर पर वर्षा 311.2 एमएम होती है। 21 अगस्त 2025 तक लगभग 30 हजार 315 एकड़ क्षेत्र जलमग्न है जिसे खाली करने के लिए 1,452 पंप लगाए गए हैं। इनकी कुल क्षमता 7 हजार 684 क्यूसेक है। अनुमान है कि 31 अगस्त 2025 तक जलभराव पूरी तरह से खत्म कर दिया जाएगा।