पूरे दिन बनती रही रणनीति
शुक्रवार को दोनों राज्यों की सरकारें पानी को लेकर अपनी-अपनी रणनीति बनाती रहीं। हरियाणा सरकार ने पानी न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया है। राज्य की सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी ने बताया कि सरकार दस्तावेज तैयार करा रही है। सरकार पानी से संबंधित सभी तथ्य सुप्रीम कोर्ट में रखेगी। वहीं, सैनी सरकार ने इस मामले में शनिवार को सर्वदलीय बैठक बुला ली है।
पंजाब सरकार ने भी इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाई। इसमें सभी दलों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के फैसले का समर्थन किया। बैठक में निर्णय लिया गया कि सोमवार को इस मुद्दे पर पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के बाद सभी दलों का प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलेगा, ताकि सालों से पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बीच चले आ रहे इस जल विवाद का ठोस हल निकाला जा सके।
कपास की बिजाई का दिया हवाला
दिल्ली में केंद्रीय गृह सचिव की ओर से बुलाई गई बैठक में हरियाणा की ओर से मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी और गृह व वित्त सचिव सुमिता मिश्रा शामिल हुईं। हरियाणा ने मजबूती से पक्ष रखते हुए 8500 क्यूसेक पानी की मांग दोहराई। इसके पीछे तर्क दिया गया कि इस समय राज्य में पेयजल संकट चल रहा है। कपास की बिजाई का समय है। केंद्र ने नंगल बांध में ताला लगाने और पुलिस का पहरा लगाने पर पंजाब के मुख्य सचिव के समक्ष आपत्ति जताई और तत्काल पुलिस का पहरा हटाने को कहा। भाखड़ा से हरियाणा को अभी 4000 क्यूसेक पानी दिया जा रहा है। इसमें से 800 क्यूसेक राजस्थान, 500 क्यूसेक दिल्ली और 400 क्यूसेक पानी पंजाब को भी जाता है। हरियाणा 8500 क्यूसेक पानी मांग रहा है।
आज हरियाणा निवास में होगी सर्वदलीय बैठक
हरियाणा सरकार की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक शनिवार दोपहर दो बजे हरियाणा निवास में होगी। इसमें भाजपा, कांग्रेस, इनेलो, आप, बसपा, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया और नेशनल पीपुल्स पार्टी के प्रदेश अध्यक्षों को बुलाया गया है।