हरियाणा में खतरनाक श्रेणी के शिकारी कुत्तों के हमले की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। गुस्सैल और आक्रामक स्वभाव के इन कुत्तों को पालना ही नहीं खरीदना-बेचना भी प्रतिबंधित है लेकिन इसके बाद भी इनकी खुलेआम खरीद-फरोख्त होती और घरों में पाले जा रहे हैं। केंद्र सरकार से 2024 में आदेश जारी होने के बाद भी शहरी स्थानीय निकाय विभाग और पशुपालन विभाग के अधिकारी आज तक इसकी निगरानी का कोई सिस्टम नहीं बना पाए हैं।
शहरी स्थानीय निकाय विभाग के पास 87 निकायों में घरों में पाले गए कुत्तों के पंजीकरण का ब्योरा तक नहीं है। वहीं, डेयरी एवं पशु पालन विभाग खतरनाक श्रेणी के प्रतिबंधित कुत्तों की बिक्री करने वालों की जांच नहीं कर रहा। भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबीआई) ने 19 मार्च 2024 को कुत्तों की 11 खतरनाक नस्लों को पालतू जानवर के रूप में घरों में रखने पर प्रतिबंध लगाया था।
इन नस्लों के आयात, प्रजनन, पालतू जानवरों के रूप में बिक्री, पंजीकरण पर भी पूरी तरह से पाबंदी लगाई गई थी। शहरी स्थनीय निकाय निदेशालय ने कुत्ते पालने के पंजीकरण का जिम्मा 11 नगर निगमों, 25 नगर परिषदों और 52 नगर पालिकाओं पर छोड़ दिया है। खुद न निगरानी की और न कभी समीक्षा। 2025 में सुप्रीम कोर्ट के कुत्तों के आतंक पर अंकुश के आदेश के बाद विभाग ने प्रतिबंधित कुत्तों और घरों में कुत्ते पालने के लिए पंजीकरण को लेकर सख्त नीति बनाने का मसौदा बनाया।
इसमें नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माने का प्रावधान था मगर वह मसौदा ही आगे नहीं बढ़ सका।प्रतिबंधित श्रेणी के कुत्तों की बिक्री रोकने की जिम्मेदारी पशुपालन एवं डेयरी विभाग के पास है लेकिन इसके अधिकारी भी आंखें बंद करके बैठे हैं। कुत्तों की खरीद-फरोख्त करने वालों के लिए हरियाणा पशु पालन एवं डेयरी विभाग से लाइसेंस लेना अनिवार्य है लेकिन पशुपालन विभाग से ऐसे पूरे प्रदेश में 8 से 9 लाइसेंस लिए गए हैं। पिछले दो वर्षों से इन दुकानों पर किन श्रेणी के कुत्तों की बिक्री हो रही है इसका निरीक्षण भी नहीं किया गया।