साथ कार्यक्रम के तहत माता-पिता को तनाव के शुरुआती लक्षण पहचानने और बच्चों की बात समझने की मिलेगी जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग माता-पिता को जागरूक करेगा। इसके लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) हरियाणा और स्कूल शिक्षा विभाग मिलकर साथ (एसएएटीएच) कार्यक्रम शुरू करने जा रहे हैं। इसके तहत स्कूलों में हर महीने अभिभावकों के लिए जागरूकता सत्र आयोजित किए जाएंगे।
स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य माता-पिता को बच्चों में मानसिक तनाव के शुरुआती लक्षण पहचानने, उनकी बात ध्यान से सुनने और जरूरत पड़ने पर समय पर मदद लेने के लिए तैयार करना है। इसके लिए स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग के नोडल अधिकारी मिलकर सालभर की गतिविधियों का कैलेंडर तैयार करेंगे। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन हरियाणा के निदेशक डॉ. आरएस ढिल्लों ने बताया कि किशोरावस्था में परीक्षा का दबाव, दोस्तों से मनमुटाव, बुलिंग यानी चिढ़ाने या डराने और डिजिटल गतिविधियों से जुड़ी समस्याएं सामने आ सकती हैं। कुछ मामलों में नशे की शुरुआत का जोखिम भी रहता है। सत्रों में अभिभावकों को मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक बदलाव, हिंसा और नशे के खतरों के बारे में जानकारी दी जाएगी। उन्हें बच्चों से बिना डांटे बात करने और चेतावनी के संकेतों को पहचानने के तरीके भी बताए जाएंगे। किसी बच्चे में परेशानी के संकेत मिलने पर शिक्षक या माता-पिता की मदद से उसे स्कूल काउंसलर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और किशोर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचाया जाएगा। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की सहायता भी ली जाएगी। डॉ. ढिल्लों ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बातचीत को बढ़ावा देना है। अभिभावक सहायता के लिए टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 पर भी संपर्क कर सकते हैं।