जीवन हत्याकांड में न्याय की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच टकराव और बढ़ गया है। एक तरफ जहां संघर्ष समिति और प्रशासन के बीच बातचीत के जरिए समाधान का दावा किया जा रहा था, वहीं दूसरी ओर पुलिस ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रमुख चेहरों पर संगीन धाराओं के तहत कानूनी शिकंजा कस दिया है।
थाना शहर हांसी के अंतर्गत सिसाय पुल चौकी क्षेत्र में दर्ज एफआईआर के तहत पुलिस ने नामजद आंदोलनकारियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से कोर्ट ने सभी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
राष्ट्रीय सम्मान अपमान और PDPP एक्ट के तहत मामला दर्ज
थाना शहर हांसी के प्रबंधक अफसर निरीक्षक सुखजीत सिंह की ओर से दर्ज मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता की धारा 189(6), 190, 191(2), 191(3), 109(1), 121, 61(2), 152, 223, 132, 221, 351(3) के अलावा राष्ट्रीय सम्मान का अपमान निवारण अधिनियम 1971 की धारा 2 व 3 तथा सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम (PDPP Act) 1984 की धारा 3 लगाई गई है।
इन 10 लोगों पर दर्ज हुआ केस
शमशेर नम्बरदार पुत्र रणजीत सिंह (निवासी लाडवा) , सुरेन्द्र पुत्र चन्द्रभान (निवासी पड़ाव चौक, हिसार), सुभाषचन्द्र पुत्र बदन सिंह (निवासी नहला), सतपाल पुत्र धनसिंह (निवासी लाडवा) , सुरेश पुत्र दलीप सिंह (निवासी कौथ कलां), सुमित पुत्र धर्मबीर (निवासी चिड़ी, जिला रोहतक), रणबीर पुत्र मांगेराम (निवासी उमरा), वजीर पुत्र रामधन (निवासी लाडवा) जगमहेन्द्र पुत्र रामफल (निवासी बहु अकबरपुर) सुलेन्द्र पुत्र मांगेराम जाट (निवासी किनाला)
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
धरने पर बैठे परिजनों और संघर्ष समिति के सदस्यों ने प्रशासन पर धोखे का आरोप लगाया है। समिति का कहना है कि प्रशासन ने एक तरफ बातचीत की मेज पर बुलाकर शांति का दिखावा किया। वहीं दूसरी तरफ आंदोलन को कुचलने के लिए नेतृत्वकर्ताओं को जेल भिजवा दिया। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलता, यह आंदोलन जारी रहेगा। अदालत के आदेश और इलाके में बढ़ते तनाव को देखते हुए संवेदनशील स्थानों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।