अमेरिकी संसद में भारत में कन्या भ्रूण हत्या पर चिंता जाहिर करने के बाद हरियाणा के जिला जींद के गांव बीबीपुर की पंचायत गांव की महिलाओं की ओर से कन्या भ्रूण हत्या पर किए सराहनीय कार्य से अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को अवगत कराएगी।
प्रदेश की एकमात्र हाईटेक बीबीपुर पंचायत अमेरिकी राष्ट्रपति की ऑफिशियल बेवसाइट की सदस्य है। बीबीपुर पंचायत अपनी साइट से ही महिलाओं द्वारा कन्या भ्रूण हत्या पर किए सराहनीय कार्य को अमेरिकी राष्ट्रपति को भेजेगी।
इस कार्य की चर्चा पूरे देश में हो चुकी है। बीबीपुर की वीरांगनाएं अमेरिकी संसद को यह संदेश देना चाहती हैं कि कन्या भ्रूण हत्या की चिंता उन्हें भी है।
10 सितंबर को अमेरिका की सीनेट में भारत में महिलाओं पर बढ़ रहे अपराध और इंडियाज मिसिंग गर्ल्स पर रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी।
इस रिपोर्ट में चिंता जाहिर की गई है कि भारत में महिलाओं पर लगातार अपराध बढ़ रहे हैं। इतना ही नहीं, कन्या को तो गर्भ में ही मार दिया जाता है।
इस रिपोर्ट को अमेरिकी सीनेट में प्रस्तुत करने के बाद बीबीपुर की वीरांगनाओं ने फैसला किया है कि भारत में एक ऐसा भी गांव हैं, जहां महिलाओं को न केवल सम्मानजनक दृष्टि से देखा जाता है बल्कि यहां की महिलाओं ने कन्या भ्रूण हत्या को लेकर पूरे देश में डंका भी बजाया है।
14 जुलाई 2012 को देश में पहली बार खाप पंचायतों ने एक मंच पर एकत्रित होकर कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अभियान चलाने का फरमान जारी किया था।
इससे पहले 18 जून 2012 को बीबीपुर गांव में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद भारत में पहली बार कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ ग्रामसभा की बैठक आयोजन किया गया।
इसे न केवल आयोजन किया गया बल्कि उसको पंचायत के रिकार्ड में भी दर्ज किया। इसके बाद ग्रामीण विकास मंत्रालय ने सभी ग्राम पंचायतों को आदेश दिए कि कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ ग्रामसभा का आयोजन किया जाए और उसका रिकार्ड भी सुरक्षित रखा जाए।
वेबसाइट से माध्यम से ये कुछ भेजेगी पंचायत
बीबीपुर के सरपंच सुनील कुमार जागलान ने बताया कि पिछले एक साल में बीबीपुर की वीरांगनाओं ने कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ क्या-क्या अभियान चलाया है।
मीडिया की रिपोर्ट, ग्रामसभा की वीडियो क्लीपिंग, महापंचायत की क्लीपिंग, गांव का सामाजिक ढांचा, भारत एवं हरियाणा सरकार कन्या भ्रूण हत्या पर क्या कदम उठा रही हैं और उन्हें किस तरह का सहयोग व्यवस्था से मिला है। इसे बेवसाइट के माध्यम से अमेरिकी राष्ट्रपति भवन व्हाइट हाउस को भेजा जाएगा।