ढिगावामंडी। श्रावण के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के अवसर पर कस्बे के दादा भोमिया मंदिर में 11 हजार पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजा-अर्चना की गई। काशी और मथुरा से आए पांच पंडितों ने विधि-विधान से पूजा करवाई।
मंदिर में पहली बार आयोजित इस विशेष पूजा में ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। महिलाओं की भागीदारी सबसे अधिक रही। उन्होंने अपने हाथों से सैकड़ों शिवलिंग बनाए और पूजा में हिस्सा लिया। दादा भोमिया मंदिर के पुजारी जयप्रकाश शर्मा ने बताया कि पार्थिव शिवलिंग की पूजा सनातन धर्म में सबसे फलदायी पूजा मानी गई है।
पार्थिव का अर्थ मिट्टी से बना हुआ होता है। उन्होंने कहा कि पौराणिक समय में की जाने वाली इस पूजा को लोग भूलते जा रहे हैं। पार्थिव शिवलिंग शुद्ध मिट्टी से हाथों से बनाया जाता है। इसमें प्राण प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती।
मान्यता है कि शिवलिंग बनाते ही भगवान शिव उसमें विराजमान हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि यह पूजा सहज और सुलभ है। मिट्टी, जल, बेलपत्र और दूध से ही पूजा की जा सकती है।
पंडित जयप्रकाश शर्मा ने बताया कि यह पूजा तत्काल फलदायी मानी जाती है। इस अवसर पर मनोज नेहरा, सुभाष जोगी, कुलदीप, संजय, धर्मवीर, प्रवीण, रमेश तंवर और राजा नेहरा ने भाग लिया।