भिवानी। कैंसर की बीमारी जिले के लिए लगातार ही घातक होती जा रही है। इसकी चपेट में हर साल 35 से 40 महिला एवं पुरुष आ रहे हैं। इनमें से ज्यादातर पुरुष गले के कैंसर और महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित हैं। आज विश्व कैंसर दिवस है। इसी को लेकर चिकित्सकों ने बताया कि कैंसर का कारण क्या और इलाज कराकर कैसे स्वस्थ हो सकते हैं।
चिकित्सकों के अनुसार पुरुषों में कैंसर का मुख्य कारण धूम्रपान और तंबाकू उत्पादों का सेवन है। वहीं महिलाओं में कैंसर जन्मजात बताया जा रहा है। इसके अलावा अपौष्टिक आहार की वजह से कैंसर जैसी बीमारियों हो रही हैं। फास्ट फूड के नाम पर परोसा जाने वाला खाना स्वास्थ्य के लिए बहुत ज्यादा हानिकारक साबित हो रहा है। वहीं खेती के दौरान किसानों द्वारा फसल में डाले जाने वाले अंधाधुंध कीटनाशक दवा और स्प्रे भी अपौष्टिक आहार का मुख्य कारण हैं। खाने के नाम पर आमजन जहर खा रहे हैं, जोकि कैंसर के कारण में से एक है। ऐसे में लोगों द्वारा अपने स्वास्थ्य के प्रति न बरती जाने वाली सावधानी बड़ा खतरा बन रही है।
ओपीडी में हर साल आ रहे 35 से 40 नए मरीज
अस्पताल की ओपीडी में सर्जन, फिजिशियन वर्ष भर में 350 से 400 मरीजों में गांठ होने के कारण उन्हें कैंसर की जांच की सलाह दे रहे हैं, जिनमें से हर साल 35 से 40 यानी 10 फीसदी कैंसर ग्रस्त मरीज सामने आ रहे हैं। ऐसे में यह आंकड़ा हर साल बढ़ता जा रहा है। फिलहाल अस्पताल में ईएनटी विशेषज्ञ न होने की वजह से मरीजों को पीजीआईएमस रोहतक या फिर निजी अस्पताल में जाना पड़ रहा है। जिले में कैंसर के फिलहाल करीब 300 मरीज हैं। कैंसर ग्रस्त मरीज नागरिक अस्पताल, पीजीआईएमएस रोहतक सहित निजी अस्पतालों से उपचार ले रहे हैं। जिले में कैंसर से ग्रस्त कुछ मरीजों की मौत भी हो चुकी है, मगर उसकी स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में स्थायी पुष्टि नहीं है। वहीं विशेषज्ञों ने बताया कि कैंसर की गांठ में दर्द नहीं होता और यह धीरे-धीरे बढ़ती रहती है। ऐसे में विशेषतौर पर महिलाओं को 35 साल की आयु के बाद चेकअप जरूर करवाना चाहिए। जिले में ब्रेस्ट कैंसर, तंबाकू से होने वाले मुंह व गले के कैंसर के काफी मरीज हैं।
चिकित्सक के परामर्श पर करवा सकते हैं निशुल्क जांच
नागरिक अस्पताल में कैंसर की जांच की निशुल्क सुविधा है। चिकित्सक के परामर्श के अनुसार मरीज अस्पताल के ब्लड बैंक में जाकर इसकी जांच करवा सकते हैं। कैंसर की जांच के लिए एफएनएसी जांच की जाती है। एफएनएसी (फाइन निडिल एस्पिरेशन साइटोलॉजी) बारीक सुई से गांठ की भीतरी तहों को कुरेदकर वहां हुई कोशिकाओं को उसी सुई से खींचकर निकाला जाता है और माइक्रोस्कोप से उसकी जांच की जाती है। बेहद छोटी या अस्पष्ट गांठों के लिए अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे या सीटी स्कैन गाइडेड एनएनएसी की जाती है।
कीमोथैरेपी के लिए जाना पड़ता है पीजीआई रोहतक
कैंसर के उपचार के लिए जिले के मरीजों को पीजीआईएमएस रोहतक जाता पड़ता है। कैंसर मरीजों के रोडवेज विभाग ने निशुल्क बस पास बनाए हुए हैं। रोडवेज की ओर से कैंसर मरीजों की कीमोथैरेपी के लिए 150 किलोमीटर तक की दूरी के निशुल्क बस पास बनाए जाते हैं। फिलहाल करीब 300 मरीजों के पास बनाए गए हैं। एक इनके साथ केयर टेकर के रूप में जा सकता है।
ऑपरेशन के बाद जीवन हुआ सुखद : शीला देवी
गांव लोहानी निवासी शीला देवी ने बताया कि वह गांव में बतौर आशा वर्कर कार्यरत हैं। उन्हें करीब दो साल से ब्रेस्ट में गांठ थी, जिसकी वजह से उन्हें अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंता रहती थी। जनवरी 2021 में वह नागरिक अस्पताल में जनरल सर्जन डॉ. रमेश लांबा से जांच करवाने के लिए आईं तो उन्हें ब्रेस्ट कैंसर की पुष्टि हुई। कैंसर की वजह से वे भयभीत हो गई थीं। मगर फरवरी 2021 में ही डॉ. रमेश लांबा ने उनका ऑपरेशन कर गांठ को निकाल दिया, जिसके बाद वह स्वस्थ हैं। आशा वर्कर शीला देवी ने बताया कि वे अब सुखद जीवन व्यतीत कर रही हैं। (संवाद)
अपौष्टिक आहार से बचें
जिले में कैंसर के मरीजों में अधिकतर पुरुषों को धूम्रपान और तंबाकू उत्पादों के सेवन की वजह से गले का कैंसर हो रहा है। वहीं महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर हो रहा है। ऐसे में अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखते हुए धूम्रपान, तंबाकू उत्पादों और अपौष्टिक आहार का सेवन करने से बचें। कैंसर के मरीज के उपचार के लिए कीमोथैरेपी, रेडियोथैरपी और सर्जरी की जाती है, यह मरीज की हालत में निर्भर होता है। साथ ही खाने में केमिकल होना भी स्वास्थ्य को हानि पहुंचा रहा है।
- डॉ. रमेश लांबा, जनरल सर्जन, नागरिक अस्पताल।
चलाते हैं जागरूकता अभियान
स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर कैंसर जागरूकता अभियान चलाता है। इसके साथ ही ओपीडी में आने वाले किसी मरीज में कैंसर के लक्षण दिखाई देते हैं तो उसकी जांच की जाती है। जिले के कैंसर मरीजों के लिए रोडवेज बस में निशुल्क पास की व्यवस्था की हुई है। स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर मरीजों को बस पास उपलब्ध करवाता है।
- डॉ. रघुबीर शांडिल्य, सिविल सर्जन।