मानसून के बादल इस बार ज्यादा पानी लेकर आए। बरसात के साढ़े तीन महीनों में इस दफा सौ एमएम ज्यादा बरसात हुई। जितनी बरसात 2014 के चार महीने के दौरान हुई, उतनी बरसात अकेले जुलाई महीने में ही हो गई। अच्छी बरसात से इस मर्तबा अच्छी फसल की उम्मीद से किसान खुश हैं।
मई, जून, जुलाई व अगस्त महीनों में इस बार अच्छी बरसात हुई। पिछले कई सालों में पहली बार जिले की औसत बरसात (350 एमएम) के आंकड़े के नजदीक बरसात हुई है। इन महीनों के तीन साल के बरसात के आंकड़ों पर गौर करें तो इस दफा सबसे ज्यादा अब तक 307.4 एमएम बरसात हुई। अभी अगस्त का एक सप्ताह बाकी है। पिछले साल 202 और 2014 में 172.28 एमएम बारिश दर्ज की गई। यानी, औसत बरसात के आंकड़े से काफी कम बरसात हुई।
इस वर्ष जुलाई महीने में ही 175.3 एमएम बारिश हुई। पिछले दो वर्षों के दौरान औसत से कम बारिश होने से किसानों को मेहनत का पर्याप्त फल नहीं मिला। लेकिन इस वर्ष मानसून मेहरबान होने से कपास, बाजरा, ग्वार, धान, अरहर, मूंग, तिल आदि की बिजाई में काफी फायदा हुआ। फसलों की बिजाई के समय से ही नियमित अंतराल पर बारिश होने से किसानों के सामने पानी की कमी नहीं आई। वहीं कपास में हरा तेला व सफेद मक्खी का प्रभाव भी कम पाया गया। खरीफ फसलों में अधिकतर की लक्ष्य अनुरूप बिजाई की गई।