पिछले पांच साल में शहर की जनसंख्या भले ही 20 हजार से अधिक बढ़ी हो मगर नगर परिषद की नई मतदाता सूची में 5458 लोग ही नए जुड़े हैं। पहले दर्जनभर कॉलोनियों को शहरी सीमा से बाहर कर उनके वोट काट दिए गए और अब करीब ढाई हजार मतदाताओं के नाम के सामने शिफ्ट लिखकर उनके नाम काट दिए गए हैं। ये मतदाता भले ही शहर की किसी अन्य कॉलोनी में रहते हो मगर इन्हें अब मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करवाने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ेगी।
शहर की वार्डबंदी फाइनल होने के बाद अब शहर की सरकार चुनने यानी नगर परिषद के चुनाव की तैयारियों जोरों पर है। सभी वार्डों की मतदाता सूची तैयार कर ली गई है। शहर में इस बार एक लाख 16 हजार 142 मतदाता शहर के 31 पार्षदों का चुनाव कर शहर की सरकार बनाएंगे। पिछले वर्ष एक लाख 10 हजार 684 मतदाता थे। जिनमें 59 हजार 661 पुरुष और 51 हजार 23 महिलाएं थी। जिनमें से 82 हजार 29 ने मतदान किया था।
एक गली में ही दूसरी जगह रहने वालों के नाम के आगे भी लिखा शिफ्ट
मतदाता सूचि तैयार करने में जुटे बीएलओ और अन्य कर्मचारियों ने एक ही गली में दूसरी जगह शिफ्ट हुए लोगों के नाम भी काटकर उनकी जगह शिफ्ट लिख दिया है। अधिकतर परिवार बढ़ने के कारण एक भाई ने दूसरी जगह बना लिया। उनके नाम के सामने शिफ्ट लिखकर उनके नाम भी मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। इससे लोगों में रोष है। निवर्तमान पार्षद शिव कुमार, जैन चौक वासी रामनिवास ने बताया कि शहर या जिले से बाहर शिफ्ट हो तो उसका नाम काटना तो बनता है। मगर एक ही गली में दूसरी जगह शिफ्ट हो रहा है तो सिर्फ परेशान करने वाली बात है। अब न तो आसानी से दोबारा पहचान पत्र बनेगा और मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए भी अनेक चक्कर लगाने होंगे।
20 हजार कम हैं वोटर
अब नई मतदाता सूची की बात की जाए तो इसमें करीब 20 हजार वोट कम है। इसका सबसे बड़ा कारण रहा करीब दर्जनभर कॉलोनियों का शहर की सीमा से बाहर होना। इसके बाद ढाई हजार मतदाताओं के शिफ्ट के नाम पर कट गए और करीब एक हजार से अधिक वोटर ऐसे हैं जिनमें बुजुर्गों या किसी अज्ञात कारणों के चलते मौत, लड़कियों की शादी हो गई है।
उम्मीदवारों ने कसी कमर
शहर की नई वार्डबंदी और मतदाताओं की सूची तैयार होने के साथ ही चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों ने भी लोगों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। निवर्तमान 31 पार्षदों में से भी 25-26 पार्षद चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे है। वहीं नए चेहरे भी इस बार खूब देखने को मिलेंगे। ये उम्मीदवार न केवल लोगों से मेल-मिलाप बढ़ा रहे हैं बल्कि छोटे-मोटे काम मतदाता सूची में नाम डलवाना, बीएलओ के साथ घर-घर जाकर वेरीफिकेशन में भी मद्द कर रहे हैं।