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जलभराव का दंश : श्मशान जाने को कंधे की बजाये ट्रैक्टर पर निकलती है शवयात्रा

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गांव प्रेम नगर में अंतिम संस्कार के लिए शव को ट्रैक्टर में लेकर जाते ग्रामीण। - फोटो : Bhiwani
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गांव प्रेमनगर में बरसाती जलभराव का दंश ग्रामीण और किसान झेल रहे हैं, मगर अब तो ये हालत हो गई है कि गांव से श्मशान घाट तक जाने का रास्ता भी दरिया में तबदील हो चुका है। गांव में किसी की मौत पर श्मशान घाट तक की शव यात्रा कंधों पर नहीं बल्कि ट्रैक्टर के जरिए ही होती है। जलभराव की वजह से भूमि भी दलदल हो चुकी है, जिसमें ट्रैक्टर भी फंस जाते हैं और कई बार मुर्दा गिरने की भी घटनाएं हो चुकी हैं।
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शनिवार रात गांव प्रेमनगर में 62 वर्षीय हवा सिंह की मौत हो गई। सुबह हवा सिंह के शव को श्मशान घाट ले जाने लगे तो उसे अपनों का कंधा भी नसीब नहीं हुआ। श्मशान घाट तक जाने के लिए शव को ट्रैक्टर ट्रॉली के अंदर रखा गया और कुछ लोग ट्रैक्टर में सवार हो गए। जबकि कुछ ग्रामीण पानी के अंदर ही उसे पैदल पार कर श्मशान घाट तक पहुंचे। इस हालत पर ग्रामीणों का कहना है कि वे श्मशान घाट तक का रास्ता पक्का कराने की मांग को लेकर सरपंच से लेकर विधायक और डीसी तक गुहार लगा चुके हैं। पूर्व सरपंच संदीप कुमार ने बताया कि श्मशान घाट के रास्ते में जलभराव के चलते लोग शवों को कंधा तक नहीं दे पाते। मृतक हवा सिंह के भतीजे दर्शन सिंह व चचेरे भाई जगपाल ने बताया कि किसी की मौत होने पर शव को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट तक ले जाने के लिए ट्रैक्टर किराये पर लाना पड़ता है। ट्रैक्टर नहीं मिलने तक शव को घर पर ही रखना पड़ता है। पर वो चाह कर भी शव को कंधा नहीं दे पाते।
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