बड़े बदलाव के बाद आखिरकार शहर की नई वार्डबंदी फाइनल हो गई है। शहरी स्थानीय निकाय विभाग के प्रधान सचिव ने फाइनल की गई वार्डबंदी की कॉपी नगर परिषद कार्यालय भेज दी है। नई वार्डबंदी के बाद शहर के सभी वार्डों का भूगोल बदल गया है। पिछली वार्डबंदी में छूटी शहर की बाहरी कॉलोनियों को भी दायरे में शामिल किया गया है। पार्षदों व अन्य की आपत्तियों को भी ध्यान में रखते हुए कुछ बदलाव किए गए है। हालांकि, कुछ निवर्तमान व पूर्व पार्षदों को अब भी वार्डबंदी रास नहीं आ रही है, मगर अब एतराज का मौका नहीं मिलेगा।
शहर की वार्डबंदी का मसला पिछले करीब आठ-नौ माह से लटका हुआ है। सर्वे के बाद हुई शहर की वार्डबंदी पर पार्षदों ने आपत्तियां जताई थी। करीब 83 लोगों ने वार्डबंदी पर सवाल उठाये थे।
लंबे समय तक लटके रहने के बाद आखिरकार शिकायतों का निपटारा करते हुए वार्डबंदी तैयार की। संशोधन के साथ भेजी गई वार्डबंदी को शहरी निकाय विभाग मुख्यालय ने मंजूरी दे दी है और वार्डबंदी को फाइनल कर दिया गया है। नई वार्डबंदी के बाद शहर के सभी वार्डों का भूगोल ही बदल गया है।
आपत्तियां अभी बरकरार
बेशक, वार्डबंदी को फाइनल कर दिया गया हो और अब आपत्ति का भी मौका न हो, मगर निवर्तमान व पूर्व पार्षद इस पर सवाल खड़े कर रहे हैं। पार्षदों का आरोप है कि पिछली वार्डबंदी पर उठाये गए सवालों में से महज 10 प्रतिशत का भी समाधान नहीं किया गया। वार्ड 30 से विरेंद्र टोनी ने बताया कि विजय नगर व आसपास की कॉलोनियों के दो टुकड़े गए रेलवे रोड सड़क के दूसरी ओर की कृष्णा कॉलोनी कुछ हिस्से को वार्ड 30 में शामिल किया गया है, जो कि गलत है। पार्षद बिल्लू बादशाह, शिव कुमार, विजय पंचगावा आदि ने भी वार्डबंदी पर आपत्ति जताई।