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Bhiwani News: पशु अस्पतालों में सिर्फ फिनाइल और कीड़े मारने का तेल, दवाएं न होने से पशु चिकित्सा हुई फेल

Tue, 19 Dec 2023 11:19 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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भिवानी।
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राजकीय पशु अस्पतालों में सिर्फ फिनाइल और कीड़े मारने का तेल ही बचा है, जबकि पशुओं के लिए दवाइयां नहीं होने से पशु चिकित्सा व्यवस्था भी फेल हो रही है। जिले के पशुपालकों को बाहर से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं, वहीं पशु अस्पतालों में दवाइयों का पिछले कई महीनों से टोटा बना हुआ है।
हालांकि मुख्यालय में अब दवाइयों की खरीद के टेंडर कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है। जिससे पशु अस्पतालों में दवाइयों की व्यवस्था होने में करीब दो माह लग जाएंगे। इतना ही नहीं पशु अस्पतालों में वैक्सीन तक नहीं बची है। ऐसे में पशुओं पर मौसमी बीमारियों के संक्रमण से उबारने के लिए पशुपालन विभाग के पास कोई पुख्ता प्रबंध नहीं हैं। हालांकि मुख्यालय में दवाइयों के टेंडर में हुई देरी के बाद विभाग ने दवाइयों की वैकल्पिक व्यवस्था बनाने के लिए पशुपालन विभाग के उपनिदेशक को दो लाख रुपये तक की इमरजेंसी दवाइयों की खरीद करने की अनुमति दी है। जिसको लेकर मुख्यालय ने पशुपालन विभाग के सभी पशु उप निदेशकों को पत्र भी जारी कर दिया है।
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हर साल करोड़ों रुपयों की दवाइयों की खपत करने वाले विभाग में सरकारी अस्पतालों में दवाइयों की उपलब्धता कराने को लेकर यह बजट भी महज औपचारिकता ही है। सर्दी के मौसम में अक्सर पशुओं को बुखार व नाक से पानी आने की शिकायत रहती है। पशुपालक अपने पशुओं को पशु चिकित्सालयों में तो लेकर जा रहे हैं, लेकिन परामर्श के अलावा उनको दवा नहीं मिल रही है।


जिले में 59 पशु अस्पताल और 88 पशु औषधालय केंद्र
भिवानी जिले में पशुपालन विभाग के 59 राजकीय पशु अस्पताल हैं। जिनमें वेटरनरी सर्जन के 63 पद विभाग से स्वीकृत हैं, लेकिन नियुक्ति महज 45 वेटरनरी सर्जन ही हैं। इसी तरह 159 वीएलडीए के पद स्वीकृत हैं, मगर पशु अस्पतालों में 139 वीएलडीए ही हैं। भिवानी जिले में 88 राजकीय पशु औषधालय खुले हुए हैं। भिवानी जिले में सभी प्रकार के पशुओं को मिलाकर 4,61,701 पशुओं की गणना विभाग के पास है।



पेट के कीड़ों से लेकर मुंहखुर तक की वैक्सीन नहीं
पशुपालकों का कहना है कि पशु चिकित्सालयों में पशुओं के लिए दवा नहीं मिलती है। पशुओं के लिए पशु चिकित्सालय में दस्त, पेट के कीड़ों, बुखार, भूख न लगने की दवा, दूध की कमी की दवा मिलनी चाहिए, लेकिन यह दवाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। साथ ही मुंहखुर की वैक्सीन की भी कमी है। एंटी रेबीज, एन्टोबायोटिक एनालजीन जैसी दवाएं भी पशु चिकित्सालयों में नहीं हैं। बाजार में इनके मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं।
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राजकीय पशु चिकित्सालय में इस साल दवाइयों का स्टॉक नहीं आया है। मुख्यालय में टेंडर प्रक्रिया में देरी होने की वजह से दिक्कतें आई हैं। लेकिन पशुपालन विभाग ने दो लाख रुपये कीमत तक की दवाइयों की आपात खरीद की अनुमति दी है। पशु अस्पतालों से डिमांड मांगी गई है, जिन दवाओं की कमी है उनकी सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के हिसाब से खरीद कर व्यवस्था कराई जाएगी।
डॉ. रवींद्र सहरावत, उप निदेशक, पशुपालन विभाग, भिवानी।
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