एडमिशन नहीं मिलने से खफा विद्यार्थियों ने सोमवार को वैश्य कॉलेज में खूब हंगामा किया। पहले तो कर्मचारियों को विभिन्न कक्षों से बाहर निकालकर दरवाजे बंद कर दिए और दरवाजे खोलने वाले कर्मचारियों से झगड़ा किया। सूचना पर पहुंची पुलिस भी छात्रों के विरोध के सामने कुछ नहीं कर पाई। कुछ पुलिस कर्मचारियों के साथ विद्यार्थियों की नोंकझोंक भी हुई। विद्यार्थियों ने प्रिंसिपल कार्यालय के बाहर नारेबाजी कर रोष जताया। साथ ही कॉलेज प्रशासन को चेतावनी दी कि जब तक सभी विद्यार्थियों को एडमिशन नहीं दिया जाता, स्ट्राइक चलती रहेगी।
सोमवार सुबह करीब नौ बजे कॉलेज में एडमिशन नहीं मिलने से खफा छात्र प्रिंसिपल कार्यालय के पास एकत्रित हुए। यहां सबसे पहले फीस काउंटरों को बंद कराया। कुछ कर्मचारियाें ने काउंटर खोलने का प्रयास किया तो उसके साथ तीखी नोंकझोंक हुई। बाद में प्रिंसिपल कार्यालय के बाहर नारेबाजी कर रोष जताया। सूचना पर शहर थाना पुलिस और दिनोद गेट चौकी पुलिस मौके पर पहुंची।
दिनोद गेट चौकी इंचार्ज एएसआई रामअवतार ने विद्यार्थियों को समझाने का प्रयास किया तो छात्र नेताओं की उनसे कहासुनी हो गई। बाद में छात्र हंगामा करते रहे और पुलिस चुपचाप एक साइड में खडे़ होकर यह सब देखती रही। छात्र नेताओं ने बताया कि कॉलेज में एडमिशन के लिए विद्यार्थियों को हर वर्ष हड़ताल करनी पड़ती है। पिछले वर्ष मेडिकल, नॉन मेडिकल में करीब 1350 एडमिशन हुए थे। इस बार घटाकर साढे़ चार सौ सीट कर दी गई है। इसके अलावा मेडिकल में 90 सीटें है मगर 89 सीटों पर एडमिशन दिया गया। यह एक सीट किस के लिए रखी गई है। छात्र नेताओं ने चेतावनी दी कि जब तक सभी विद्यार्थियों को एडमिशन नहीं मिलता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। रोष प्रदर्शन में प्रदीप, देवा तंवर, सूर्या लोहारी, अंकित, जयदेव, मोनू रानिला आदि मौजूद थे।
यूं बिगड़ रहा खेल
पिछले वर्ष नॉन मेडिकल में करीब 13 सौ एडमिशन हुए थे। साइंस के तीनों संकायों मेडिकल, नान मेडिकल व कंप्यूटर साइंड में करीब 22 सौ एडमिशन हुए थे। उस समय इन कोर्सों की सीट तय नहीं थी। इस बार इन कोर्सोें की सीटें तय कर दी गई है। नान मेडिकल में 352, मेडिकल में 88 और कंप्यूटर साइंस में 40 सीटें। ऐसे में विद्यार्थी चाहते हैं कि पहले की तरह सबको एडमिशन मिले।
छात्र नेताओं ने भी उठाया है एडमिशन का बीड़ा
कॉलेज प्रशासन के अनुसार, अनेक विद्यार्थी ऐसे थे, जिन्होंने निर्धारित तिथि तक फार्म जमा नहीं कराए। कुछ छात्र नेताओं ने अब उनके फार्म ले रखे हैं। छात्र नेता चाहते हैं कि उनके द्वारा लिए गए फार्म वाले विद्यार्थियों को एडमिशन मिल जाए। कुछ ने विद्यार्थियों से रुपये भी ले रखे हैं।