रविवार को भिवानी से 3200 प्रवासी श्रमिकों को लेकर विशेष ट्रेनें बिहार के अररिया और कटिहार के लिए रवाना हुई। भिवानी से शाम चार बजे अररिया और पांच बजे कटिहार के लिए स्पेशल ट्रेन रवाना हुई। अररिया और कटिहार की ट्रेन में 1600-1600 प्रवासी श्रमिक रवाना हुए। पहले ट्रेन दोपहर में जानी थी, जिसके लिए मजदूरों को सुबह दस बजे तक स्टेशन पहुंचा दिया था। लेकिन बाद में समय बदला तो करीब छह घंटे तक श्रमिकों को ट्रेन चलने का इंतजार करना पड़ा। श्रमिकों को घर भेजने के दौरान एडीसी डॉ. मनोज कुमार, एसडीएम महेश कुमार, डीएसपी वीरेंद्र सिंह मौजूद रहे। गुजरानी मोड़ स्थित आश्रम से श्रमिकों को सुबह ही रोडवेज बसों से स्टेशन तक लाया गया था।
स्पेशल श्रमिक ट्रेन गाड़ी संख्या 04891 अररिया के लिए गई रवाना हुई। इस गाड़ी में 1360 प्रवासी श्रमिक भिवानी से, 141 नारनौल से और 99 श्रमिक दादरी से सवार हुए। इसी प्रकार से गाड़ी संख्या 04893 कटिहार के लिए रवाना हुई, जिसमें 1300 प्रवासी श्रमिक फतेहाबाद और 300 प्रवासी श्रमिक हिसार जिले से थे। इस ट्रेन में 22 छोटे बच्चे भी थे। इस दौरान जीआरपी चौकी प्रभारी ऊषा निरंकारी ने बताया कि भिवानी से दिल्ली तक दोनों गाडिय़ों में सुरक्षा कर्मी भी भेजे गए हैं।
एडीसी ने रेलवे स्टेशन और एसडीएम ने आश्रम में संभाला मोर्चा
एडीसी डॉ. मनोज कुमार सुबह ही स्टेशन पर पहुंचे। यहां पर उन्होंने दोनों श्रमिक स्पेशल ट्रेन की व्यवस्थाओं को देखा और अधीनस्थ अधिकारियों व कर्मचारियों को जिम्मोदारी सौंपी। उन्होंने प्रत्येक यात्री को टिकट मुहैया करवाई। वहीं दूसरी ओर एसडीएम महेश कुमार ने गुजरानी मोड़ पर बने आश्रम में मोर्चा संभाला। एसडीएम भी सुबह से आश्रम में पहुंचे। सभी पंजीकृत 1600 प्रवासी श्रमिकों का समय रहते हेल्थ चेकअप करवाया गया। बाद में उनको बारी-बारी से बसों में सवार करवाया। इसके बाद एसडीएम भी स्टेशन पर पहुंचे और प्रवासी श्रमिकों को ट्रेन में सवार करवाया।
स्टेशन के मुख्य द्वार पर थर्मल स्क्रीनिंग हुई
कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिए सभी प्रवासी मजदूरों की प्लेटफार्म पर प्रवेश से पहले ही स्टेशन के मुख्य द्वार पर थर्मल स्क्रीनिंग की गई। थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही यात्रियों रेलवे प्लेटफार्म पर प्रवेश करवाया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा प्रवासी श्रमिकों की थर्मल स्क्रीनिंग की गई। वहीं दूसरी ओर प्रवासी श्रमिकों से सैनिटाइज के प्रति जागरूक किया गया।
परिवार की खातिर आए थे यहां, अब परिवार के खातिर जा रहे वापिस
स्पेशल ट्रेन में सवार हुए प्रवासी मजदूरों का कहना था कि वे परिवार की खातिर रोजी रोटी के लिए यहां आए थे, अब परिवार की खातिर ही वापस लौट रहे हैं। अररिया वासी नारनौल से आए प्रवासी मजदूर पनवेश्वर दास ने बताया कि वे यहां पर पेंटर का काम करते थे, लेकिन लॉकडाउन होने से उनका काम बंद हो गया। ऐसे में उनका घर जाना मजदूरी हो गई है। नारनौल सेम पहुंचे प्रवासी श्रमिक दलीप कुमार ने कहा कि वे यहां पर मजदूरी का काम करते थे। घर से बार बार फोन आने के कारण वे वापस जा रहे हैं। पूर्णिया जिला निवासी मनोज ने कहा कि वे यहां पर सरसों की कटाई के लिए आए थे और अपने घर जाकर वहां पर मक्का की कटाई का काम करेंगे। परिवार की जिम्मेदारी यहां लेकर आई थी और परिवार की जिम्मेदारी से ही घर जा रहे हैं। कटिहार के लिए ट्रेन में सवार हुए फतेहाबाद से पहुंचे चंदनराम, लखीचंद और विक्रम ने बताया कि वे यहां पर गेहूं कटाई का काम करते थे। लॉकडाउन में घर पहुंचना मुश्किल हो गया। परिवार की जिम्मेदारी है, जाना तो पड़ेगा।