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सर्दी में बढ़ी बिजली की मांग, ओवरलोडिंग से फुंक रहे ट्रांसफार्मर

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06 फोटो बिजली निगम के सर्कल स्टोर में रखे खराब बिजली ट्रांसफार्मर। - फोटो : Bhiwani
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सर्दी चरम पर है तो बिजली की मांग भी बढ़ गई है। ऐसे में ट्रांसफार्मर फूंकने का सिलसिला शुरू हो गया है। औसतन तीन से पांच ट्रांसफार्मर हर रोज फूंक रहे हैं। जिन्हें ठीक करने में पांच से 24 घंटे तक का समय लग रहा है। ऐसे में लोगों को बिजली कटों की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसमें निगम को भी 15 से 55 हजार तक की चपत लग रही है। हालांकि ट्रांसफार्मर फूंकने का एक कारण रखरखाव का अभाव और तेल चोरी भी है। फिलहाल बिजली निगम अधिकारियों और कर्मचारियों के भी सुचारु बिजली देने में पसीने छूटे हुए हैं।
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रोहतक गेट क्षेत्र में रविवार को करीब पांच घंटे तक बिजली गुल रही। कारण रहा ट्रांसफार्मर में फाल्ट आना। यह सिर्फ रोहतक गेट क्षेत्र की कहानी नहीं बल्कि भिवानी के साथ-साथ दादरी जिले में भी ऐसे ही हर रोज अलग-अलग कॉलोनियों में बत्ती गुल हो रही है। सभी कारण एक ट्रांसफार्मर में समस्या आना। बताया जा रहा है कि सर्दियों में लोग पानी गर्म करने की रॉड, हीटर आदि बिजली उपकरणों का प्रयोग कर रहे है, जिनसे बिजली का लोड काफी बढ़ गया है। इसी कारण ट्रांसफार्मर जल रहे है। इसके अलावा ट्रांसफार्मरों का तेल चोरी होने पर उन्हें चलाए जाने या सही रख-रखाव न होने के कारण भी ट्रांसफार्मर जल रहे हैं।
ये हैं ट्रांसफार्मर खराब होने की मुख्य वजह
बिजली ट्रांसफार्मरों के खराब होने की मुख्य वजह बिजली का अत्यधिक लोड है। अधिकतर उपभोक्ताओं ने दो किलोवाट तक का बिजली लोड दिखाया है जबकि उसके घर के बिजली उपकरणों का लोड चार से पांच किलोवाट आ रहा है। जबकि निगम प्रबंधन उस इलाके के उपभोक्ताओं के बिजली लोड के हिसाब से ही ट्रांसफार्मर लगाता है। बिजली ट्रांसफार्मरों पर अचानक होने वाले लाइन के फाल्ट का असर भी पड़ता है, इससे भी उनकी गुणवत्ता में कमी आती है। एक फेज पर ज्यादा लोड और दूसरे फेज पर कम लोड होने से भी ट्रांसफार्मर की सेहत खराब हो रही है।
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3.47 लाख उपभोक्ता झेल रहे परेशानी
भिवानी सर्कल के अंतर्गत भिवानी व चरखी दादरी जिला के उपभोक्ता आते हैं। हजारों बिजली उपभोक्ता ट्रांसफार्मरों की समस्या के कारण बिजली कट झेल रहे है। 3.47 लाख उपभोक्ताओं के घरों तक आपूर्ति पहुंचाने के लिए निगम प्रबंधन द्वारा करीब 55 हजार से अधिक बिजली ट्रांसफार्मर स्थापित किए हुए हैं। इनमें 25 केवीए से लेकर एक हजार केवीए की क्षमता के बिजली ट्रांसफार्मर शामिल हैं। एक ट्रांसफार्मर के रखरखाव व रिपेयरिंग पर 15 हजार से लेकर 55 हजार रुपये तक का खर्च आ रहा है।
साल भर में 1095 बिजली ट्रांसफार्मर हो रहे कबाड़
बिजली निगम के सर्कल स्टोर में सालाना 1095 बिजली ट्रांसफार्मर कबाड़ बनकर पहुंच रहे हैं। ये ट्रांसफार्मर ऐसे है, जो ठीक होने लायक भी नहीं है। इनकी निगम कबाड़ में ही नीलामी कराएगा। कई बार तो एक सब डिवीजन में एक ही दिन में दो बिजली ट्रांसफार्मर भी खराब हो जाते हैं। जबकि बिजली ट्रांसफार्मर ही एक ऐसा महंगा उपकरण है जो हाई वोल्टेज को 240 वोल्ट में तबदील कर उपभोक्ताओं के लिए इस्तेमाल के लायक बनाता है।
बिजली निगम के समक्ष रोजाना ही करीब तीन बिजली ट्रांसफार्मर खराब होने की शिकायतें मिल रही हैं। एक ट्रांसफार्मर बदलने पर निगम को काफी भारी भरकम खर्च उठाना पड़ता है। जबकि खराब हुए ट्रांसफार्मर रिपेयरिंग के काबिल भी नहीं होते हैं। ये समस्या उपभोक्ताओं द्वारा खुद के सही बिजली लोड की जानकारी उपलब्ध नहीं कराने की वजह से आ रही हैं, इसके लिए निगम प्रबंधन समय समय पर स्वैच्छिक बिजली लोड घोषणा स्कीम भी चलाता है।
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- राज कुमार जाजौरिया, निगम महाप्रबंधक, भिवानी सर्कल।
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