भिवानी। कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच भी रफ्तार धीमी नहीं पड़ी, बल्कि यहां शिक्षा की गाड़ी दौड़ती रही। बच्चे घर बैठे ऑनलाइन क्लास ले रहे थे। वहीं स्कूल में क्लास रूम भी ट्रेन के डिब्बे बन चुके थे। शिक्षकों का हौसला ही उस गाड़ी को खींच रहा था।
हां, हम यहां बात कर रहे हैं बवानीखेड़ा के राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की, जहां थ्री डी पेंटिंग ने यहां की लॉकडाउन में सब कुछ बंद होने के बावजूद भी तस्वीर बदल डाली। बच्चे यहां पढ़ने आते हैं तो उन्हें क्लास रूम ट्रेन का डिब्बा नजर आता है, जिसके अंदर पहुंचने के बाद उन्हें किसी सफर का अहसास नहीं, बल्कि पढ़ाई का सकारात्मक माहौल मिलता है। कोरोना के दौरान लॉकडाउन में सालभर बच्चों ने घर बैठे पढ़ाई की, लेकिन कई खंडहर स्कूलों में आज भी बदहाली साफ झलक रही है। नए साल में खंडहर स्कूल भवनों की सूरत बदलने के लिए निदेशालय से बजट की उम्मीद भी है। कुछ स्कूल ऐसे भी हैं, जिनका सिर्फ नाम ही सरकारी है, मगर व्यवस्था उधार की है। इनमें शहर का राजकीय प्राथमिक पाठशाला नंबर एक है। जहां एक तरफ मंदिर की घंटी तो दूसरी तरफ छत पर बैठे बच्चों का ककहरा गूंजता है।
बवानीखेड़ा के राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में इस समय कक्षा छठी से 12वीं तक 767 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। स्कूल में आठ टीजीटी और 18 पीजीटी अध्यापक हैं। मॉडल संस्कृति स्कूल का बाहर का लुक बच्चों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है, वहीं अंदर बने क्लास रूम थ्री डी पेंटिंग की वजह से बच्चों के लिए मनोरंजक और रोचक बन गए हैं। सभी क्लास रूम एक ट्रेन की तरफ दिखाई देते हैं। बच्चों को यह समझना मुश्किल हो जाता है कि ये पूरी ट्रेन है या फिर उनके क्लास रूम हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारी भी ट्रेन के लुक में बने क्लास रूम देखकर हैरान रह गए। दरअसल विद्यालय की प्राचार्य संतोष भाकर ने 12 दिसंबर 2019 को प्राचार्य के तौर पर कार्यभार संभाला था। इससे पहले वह गांव बापोड़ा के सरकारी स्कूल में बतौर इकनॉमिक्स टीचर थीं। प्राचार्य के तौर पर पहली बार स्कूल की जिम्मेदारी संभाली तो नई चुनौतियां भी आईं। शिक्षा विभाग ने फेस लिफ्टिंग के लिए स्कूल को एक लाख रुपये का बजट 20-21 के लिए जारी किया। इस बजट में स्कूल स्टाफ के साथ मिलकर प्राचार्य ने लॉकडाउन के दौरान ही सरकारी स्कूल की सूरत बदल डाली और क्लासरूम भी ट्रेन के डिब्बों में बदल गए।
चौपाल में बने मंदिर की छत पर चल रही सरकारी पाठशाला
शहर के दादरी गेट क्षेत्र की अनुसूचित जाति की चौपाल के मंदिर की छत पर राजकीय प्राथमिक पाठशाला नंबर एक चल रही है। यहां पर पहली से पांचवीं तक करीब 280 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि सात शिक्षकों का स्टाफ भी यहां तैनात है। एक तरफ मंदिर में आस्था की घंटी बजती है तो दूसरी तरफ छत पर बैठे बच्चों का ककहरा गूंज रहा है। स्कूल की प्राइमरी हेड कृष्णा देवी ने बताया कि वह 2016 ये यहां है, जबकि स्कूल 2003 से यहां चल रहा है। शिक्षा विभाग को भी काफी बार स्कूल भवन के संबंध में लिखा जा चुका है।
ऑनलाइन की रफ्तार में पीछे छूट गई पढ़ाई
लॉकडाउन में करीब साल भर बच्चों ने घर बैठे पढ़ाई की। ऑनलाइन क्लास के चक्कर में पढ़ाई भी काफी पीछे छूट गई। सिलेबस भी आधा रह गया और ज्ञान भी अधूरा। अब स्कूल लगे हैं, लेकिन अभी भी कोरोना की तीसरी लहर का डर उनके अंदर घर कर रहा है। पेपर होंगे या नहीं, यह भी असमंजस है।
विद्यार्थियों को प्रेरित करने के लिए करवाई थ्री डी पेंटिंग
विद्यार्थियों को प्रेरित करने और शिक्षा के प्रति उनका रुझान बढ़ाने के मकसद से स्कूल में थ्री डी पेंटिंग कराई गई थी। यह लॉकडाउन का नया अनुभव और अनूठा प्रयोग भी रहा। विभाग ने एक लाख का बजट दिया, जिसमें स्कूल की तस्वीर बदल दी। बच्चे भी लॉकडाउन के बाद स्कूल का नया लुक देखकर रोमांचित हैं। वहीं उन्हें पढ़ाई का भी अच्छा माहौल मिल रहा है।
- संतोष भाकर, प्राचार्य, राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बवानीखेड़ा।
वाकई मॉडल है स्कूल
लॉकडाउन में हमारे काफी स्कूलों के अंदर टीचरों ने गार्डनिंग व पेंटिंग के जरिये स्कूल को एक नई पहचान दिला दी। इसमें बवानीखेड़ा का मॉडल संस्कृति स्कूल पहला ऐसा स्कूल है, जहां मैंने खुद भ्रमण कर यह जाना कि क्या सरकारी स्कूल भी ऐसा हो सकता है। यह वास्तव में मॉडल की तरह है, जहां बच्चों के लिए एक से बढ़कर एक नई ज्ञानवर्धक चीजें तस्वीरों में ही खुद बयां कर रही हैं।
- संतोष नागर, उप जिला शिक्षा अधिकारी भिवानी।
बवानीखेड़ा के राजकीय मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल में थ्री डी पेंटिंग के जरिये ट्रेन के ?- फोटो : Bhiwani