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Bhiwani News: भिवानी बार में पहुंचे हाईकोर्ट के तीन न्यायाधीश, साझा कीं प्रैक्टिस के दिनों की यादें

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न्यायिक परिसर में  आयोजित कार्यक्रम में न्यायाधीश विनोद भारद्वाज  और न्यायाधीश संजय वशिष्ठ को स
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भिवानी। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश विनोद भारद्वाज, न्यायाधीश संजय वशिष्ठ और भिवानी के प्रशासनिक जज न्यायाधीश कुलदीप तिवारी बुधवार को भिवानी न्यायिक परिसर पहुंचे। इस दौरान न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं से संवाद के साथ न्यायाधीशों ने अपने प्रैक्टिस के दिनों की यादें साझा कीं।
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जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. गगनदीप कौर सिंह, अन्य न्यायिक अधिकारियों, बार एसोसिएशन के प्रधान संदीप तंवर और बार सदस्यों ने न्यायाधीशों का स्वागत किया। बार सभागार में आयोजित सम्मान समारोह में भिवानी के गांव कुड़ल निवासी न्यायाधीश विनोद भारद्वाज और गांव हेतमपुरा निवासी न्यायाधीश संजय वशिष्ठ ने भिवानी बार से जुड़ी अपनी यादें साझा कीं। इसके बाद न्यायाधीशों ने लाइब्रेरी सहित न्यायिक परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान डीसी साहिल गुप्ता, एसएसपी सुमित कुमार और एसडीएम महेश कुमार भी मौजूद रहे।

पहले मुकदमे की फीस मिली थी 1500 रुपये
न्यायाधीश विनोद भारद्वाज ने कहा कि उनकी जन्मभूमि भिवानी का गांव कुड़ल है और उन्होंने इसी भिवानी बार में प्रैक्टिस की है। उन्होंने जमीनी स्तर से अपने पेशे की शुरुआत की। उन्हें आज भी याद है कि पहले मुकदमे की फीस उन्होंने महज 1500 रुपये ली थी। उन्होंने कहा कि आज उनके पास जो कुछ है, वह उसी की बरकत है। वरिष्ठ अधिवक्ताओं से उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला और भिवानी बार में आने पर पुरानी यादें ताजा हो गईं।
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मां को दिए थे 1100 रुपये, उन्होंने गोशाला में कर दिए दान
न्यायाधीश संजय वशिष्ठ ने कहा कि उनका पैतृक गांव हेतमपुरा और कर्मभूमि भिवानी बार है। ऐसे में वे बार में नहीं बल्कि अपने परिवार के बीच आए हैं। कार्यक्रम में उनके पिता वरिष्ठ अधिवक्ता गोपीराम वशिष्ठ भी मौजूद रहे। सम्मान में दी गई पगड़ी न्यायाधीश संजय वशिष्ठ ने अपने पिता को पहनाई। उन्होंने कहा कि उन्होंने जो कुछ भी सीखा वह भिवानी बार से ही सीखा है। उन्होंने अपनी प्रैक्टिस की शुरुआत महज 1100 रुपये से की थी। फीस के पैसे उन्होंने अपनी मां के हाथ में दिए थे, जिसे उनकी मां ने गोशाला में दान कर दिया था। उन्होंने युवा अधिवक्ताओं को कड़ी मेहनत करने, अपने काम पर ध्यान देने और वरिष्ठ अधिवक्ताओं के अनुभव से सीखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सबसे पहले अच्छा इंसान बनना जरूरी है।

बार की मांगों पर प्रशासनिक जज ने दिया हरसंभव सहयोग का भरोसा
भिवानी के प्रशासनिक जज न्यायाधीश कुलदीप तिवारी ने जिला बार एसोसिएशन की ओर से नए चैंबर, वाहन पार्किंग और फैमिली कोर्ट की स्थायी व्यवस्था की मांग पर हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि बार और बेंच का गहरा नाता है और दोनों न्याय व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ियां हैं। अधिवक्ताओं को जरूरतमंद लोगों की अधिक से अधिक मदद करनी चाहिए। वकालत समाजसेवा का भी माध्यम है।
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