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Bhiwani News: बारिश के बाद नहीं हुई बाजरा की प्राइवेट बोली, भीगने से 25 हजार क्विंटल खरीद पर मंडराया संकट

Tue, 07 Oct 2025 11:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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शहर की नई अनाज मंडी में लगी बाजरे के ढेरी। संवाद
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भिवानी। बारिश के बाद मंगलवार को जिला मुख्यालय की अनाज मंडी में बाजरे की प्राइवेट बोली नहीं हो पाई। सोमवार को खुले में रखा गया बाजरा बारिश से भीग गया था जिसे अब सुखाने में करीब एक सप्ताह का समय लगेगा। बारिश के कारण लगभग 25 हजार क्विंटल बाजरे की खरीद पर संकट मंडरा गया है। वहीं तेज हवाओं के चलते खेतों में बिछी धान की फसल की कटाई पर किसानों का खर्च भी बढ़ गया है। पहले से ही मौसम की मार झेल रहे किसानों की फसल उत्पादन में भी कमी के आसार बने हुए हैं।
सोमवार को मंडी में बाजरा बारिश के पानी से पूरी तरह भीग गया था। आढ़तियों ने इसे बचाने के लिए तिरपालों की व्यवस्था की लेकिन तेज हवा के चलते तिरपाल टिक नहीं पाए। ऐसे में मंडी में मंगलवार को बाजरे की कोई भी प्राइवेट बोली नहीं हो सकी। ई-पोर्टल पर बाजरे की सरकारी खरीद 15 नवंबर तक जारी रहेगी। किसान अपनी फसल को प्राइवेट बोली पर बेचने के बाद जे-फॉर्म कटवाने के उपरांत भावांतर भरपाई योजना का लाभ उठा रहे हैं।
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मौसम की मार के कारण इस बार बाजरे का उत्पादन काफी घटा है जबकि किसान पहले से ही प्रति क्विंटल करीब 300 रुपये तक के नुकसान का सामना कर रहे हैं। ऐसे में भावांतर योजना का लाभ मिलने के बावजूद किसान मंडी की व्यवस्था में उलझे हुए हैं।

मंडी में पहुंची 400 क्विंटल कपास, नहीं मिल रहे एमएसपी पर खरीदार
भिवानी मंडी में इस समय किसानों की करीब 400 क्विंटल कपास की आवक हो चुकी है लेकिन किसानों को एमएसपी पर खरीदार नहीं मिल रहे हैं। सरकार ने कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8100 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है जबकि मंडी में किसानों की कपास 6500 से 7400 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रही है। किसानों का कहना है कि मिलर मनमाने रेट पर फसल खरीद रहे हैं जिससे उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। किसानों के अनुसार मिलर सीधे कपास की खरीद करते हैं लेकिन इस दिशा में न तो सरकार ध्यान दे रही है और न ही अधिकारी कोई कदम उठा रहे हैं।

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पिछले तीन सालों से कपास की बिक्री आढ़तियों के माध्यम से नहीं कराई जा रही है। एमएसपी पर किसान सीधे मिलर को ही अपनी फसल बेचता है। लेकिन इस बार मिलर मनमाने रेट पर कपास खरीद रहे हैं जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। किसान अब मांग कर रहे हैं कि कपास की बिक्री फिर से आढ़तियों के माध्यम से कराई जाए। किसानों का बाजरा पहले ही प्राइवेट बोली पर बिक रहा है, जिसमें भी उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। - नरेश बंसल भूरु, प्रधान, दी ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन, भिवानी
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मंडी में बाजरे की प्राइवेट बोली कराई जा रही है और किसानों को भावांतर योजना के तहत भुगतान उनके खातों में किया जा रहा है। बारिश का अधिक असर नहीं है। प्राइवेट बोली पर किसानों को उनकी फसल की गुणवत्ता के अनुसार ही दाम मिल रहे हैं। मंडी में किसानों को बाजरा बिक्री को लेकर किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं होने दी जा रही है। - देवेंद्र ढूल, कार्यकारी अधिकारी एवं सचिव, हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड, भिवानी
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