फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bhiwani News: भिवानी शहर की बाहरी कॉलोनियों में सुविधाओं की दरकार

Mon, 16 Sep 2024 07:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
विज्ञापन
विज्ञापन
भिवानी। शहर की बाहरी कॉलोनियों में पिछले एक दशक से पानी की लाइनों समेत सभी मूलभूत सुविधाओं का इंतजार है। इन कॉलोनियों के लोगों के लिए शुद्ध पेयजल किसी सपने से कम नहीं है, क्योंकि या तो इन्हें पानी खरीदकर पीना पड़ता है या फिर भूमिगत पानी को हैंडपंप से खींचकर प्यास बुझानी पड़ती है। पांच साल से नेता भी इन लोगों को यहां पेयजल लाइन डालने की सब्जबाग दिखाते रहे हैं, लेकिन मामला अनधिकृत कॉलोनियों के फेर में उलझकर रह गया है। धरातल पर इन कॉलोनियों तक पेयजल संबंधी कोई भी परियोजना नहीं पहुंची है।
विज्ञापन

शहर में 55 से अधिक ऐसी कॉलोनियां हैं, जहां अब भी पीने के पानी के लिए लोग तरस रहे हैं। लोगों ने महंगे मकान बना लिए हैं, लेकिन गली कच्ची पड़ी है तो पानी की लाइन का भी इंतजार है। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने चार दशक पुरानी पेयजल लाइनों को बदलने के साथ बाहरी कॉलोनियों में नई पेयजल लाइन डालने का खाका भी तैयार किया।
इसका मसौदा भी मुख्यालय में अटका है लेकिन इस मसौदे में भी कई कॉलोनियों के नाम गायब है। ऐसे में यहां पेयजल सुविधा कब तक मिलेगी, कुछ कहा नहीं जा सकता। लोगों का भी कहना है कि शहर में आने के बाद भी लोग पीने के शुद्ध पानी के लिए तरस गए हैं।
विज्ञापन

शहर की बाहरी कॉलोनियों में अधिकतर लोगों की पानी की जरूरतें निजी टैंकरों के सहारे पूरी हो रही है। एक टैंकर के लिए उन्हें 1,200 से 1,500 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। ये पानी भी सिर्फ सप्ताहभर ही जरूरत पूरी कर पाता है। अगर पानी की सालाना खपत का आकलन करें तो लोगों की सालाना कमाई का करीब 10 से 15 फीसदी हिस्सा तो पानी की जरूरतें पूरी करने में ही खर्च हो जाता है।


कॉलोनी में पीने के पानी की कोई सुविधा नहीं है। भूमिगत पानी भी पीने लायक नहीं है। ऐसे में हर सप्ताह पानी की जरूरतें पूरी करने के लिए रुपये खर्च कर पानी का टैंकर मंगवाना पड़ता है। यही हाल पूरी कॉलोनी का है। अधिकतर बाहरी कॉलोनियों में पानी की लाइनें नहीं हैं। जिन हिस्सों में डी प्लान के तहत पानी की लाइनें डाली है, उनके अंदर भी पानी नहीं पहुंच रहा है। इससे गर्मी के मौसम में तो यहां पानी खोजना पड़ता है। -घनश्याम शहरवासी

बिजली, पानी और सड़क मूलभूत जरूरतों में शामिल हैं, लेकिन शहरी आबादी में बाहरी कॉलोनियों के लोग इन सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। लोग जिला प्रशासन से सरकार तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन उनकी कोई सुनने वाला नहीं है। जनता का प्रतिनिधि का काम है कि उनकी आवाज शासन, सरकार तक पहुंचाए और उनकी समस्या का समय रहते समाधान कराए, लेकिन पांच साल से नेताओं के दर्शन नहीं हुए। अब चुनाव करीब है तो फिर से यहां की कॉलोनियों को लंदन, पेरिस बनाने की बातें करेंगे। -धर्मपाल शहरवासी।

शहर की डाबर कॉलोनी, सिटी स्टेशन लाइन पार काॅलोनी, डिफेंस कॉलोनी क्षेत्र समेत कोंट रोड के अधिकतर दायरे में पानी की लाइनें नहीं हैं। हांसी रोड पर देवनगर कॉलोनी के एक्सटेंशन हिस्से में पानी की लाइन नहीं डाली गई है। इन क्षेत्रों में लोगों को खरीदकर पानी पीना पड़ता है। सरकार को चाहिए कि अनधिकृत कॉलोनियों में भी बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं बिना शर्त के मिलें। -नरेश शहरवासी


जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग पानी के टैंकर केवल चुनिंदा इलाकों में ही भिजवाता है, जबकि पानी की लाइनें से दूर अधिकतर इलाकों में कोई टैंकर नहीं आता। वहां के लोग अपने बूते ही पानी की जरूरतें पूरी करते हैं। उनके सामने दो ही विकल्प रहते हैं या तो खरीदकर पानी पीओ या फिर दूरदराज के इलाके से पानी लाकर अपनी जरूरतें पूरी करो। ऐसे सिलसिला कई साल से चला आ रहा है। पानी की लाइनें डालने का आश्वासन तो मिलता है लेकिन कब डलेगी, इसका किसी के पास कोई जवाब नहीं होता। -पवन कुमार, शहरवासी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें