भिवानी। शहर की मुख्य सड़कों पर अव्यवस्था का जाम लग रहा है, जबकि ट्रैफिक भी बेलगाम है। शहर में पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं है, ऐसे में शहर के बाजारों की फुटपाथ और सड़कें भी सिकुड़ चुकी हैं। जिम्मेदार विभाग भी महज खानापूर्ति में जुटे हैं, ऐसे में सिर्फ जनता परेशानी झेल रही है।
शहरवासियों का कहना है कि शहर जाम की समस्या से जूझ रहा है। निजात दिलाने के लिए भी किसी अधिकारी का कोई ध्यान नहीं है। भिवानी शहर में पिछले पांच सालों के दौरान सड़क पर वाहनों की संख्या करीब डेढ़ गुना बढ़ गई है, जबकि मुख्य रास्तों और सड़कें पहले से ज्यादा सिकुड़ चुकी हैं। ऐसे में शहर के मुख्य हिस्सों में पार्किंग की व्यवस्था नहीं होना भी बड़ा मुद्दा है।
शहरवासी भी जाम की समस्या झेल रहे हैं। वहीं संबंधित विभागों के बीच भी कोई तालमेल नहीं हैं। ट्रैफिक पुलिस कर्मचारी केवल चौक चौराहों या फिर किसी पेड़ के नीचे दुपहिया वाहनों के चालान काटने में ही व्यस्त रहते हैं, जबकि जाम सुझलाने में उनकी भी कोई रुचि नहीं है। हालांकि पुलिस प्रशासन ने मॉनिटरिंग के लिए शहर के मुख्य चौक चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाए हैं और इसका कंट्रोल भी सदर पुलिस थाना के प्रथम तल पर बना है। मगर यहां मॉनिटरिंग करने वाला कोई नहीं है।
यही वजह है कि शहर के सरकुलर रोड पर दिनभर अधिकांश समय जाम के हालात बनते हैं, जबकि सीसी टीवी कैमरे को देखकर न तो ट्रैफिक पुलिस को सूचना होती है न चौराहे पर खड़ा ट्रैफिक हवलदार सतर्कता दिखाता है। दिनभर वाहनों का रेलमपेला रेंगता हुआ आगे बढ़ता रहता है।
शहर में लगातार वाहनों की संख्या बढ़ रही है, जो मुख्य सड़कों पर जाम लगाने का कारण बन रही हैं। शहर में दुपहिया वाहन पार्किंग के लिए भी ठीक से कोई निर्धारित जगह नहीं हैं, गाड़ियां भी मुख्य सड़कों पर ही खड़ी रहती हैं, ऐसे में वाहनों के आवागमन का रास्ता भी अवरुद्ध हो रहा है। शहर में स्कूटी पर थोड़ी दूर जाने में भी जाम की वजह से 15 से 20 मिनट लग जाते हैं। इसके समाधान के लिए ट्रैफिक पुलिस को चालान कम, जाम ज्यादा सुलझाना चाहिए। प्रशासन को भी सड़क पर अतिक्रमण को खाली करना चाहिए।
- प्रियंका शहरवासी।
भिवानी पुराने शहर में करीब चार किलोमीटर का सरकुलर रोड है, लेकिन इस छोटे से रिंग रोड पर भी वाहन दिनभर रेंगते हुए आगे बढ़ते हैं, इसकी वजह पार्किंग नहीं होना है। गाड़ियों को लोग रास्ते पर खड़े कर चले जाते हैं। शहर में ट्रैफिक को व्यवस्थित करने के लिए कोई संजीदगी नहीं दिखा रहा है। ऐसे में जो वाहन जैसे तैसे चला रहा है सब ठीक है, पुलिस बस चौक पर बैठ चालान काटने का ही काम करती है। जाम से निजात दिलाने के लिए प्राथमिकता वाहनों का सुचारु आवागमन सुनिश्चित करना होना चाहिए।
- प्रीतम शहरवासी।
शहर में मुख्य बाजारों में वाहन पार्किंग की कोई सुविधा नहीं है। सबसे अहम दुकानदारों ने पूरी फुटपाथ घेर रखी है उसके आगे सड़क को भी नहीं बख्शा है। ऐसे में छोटे वाहनों के आवागमन का रास्ता भी नहीं बचता है। यहां पैदल चलने वालों के लिए भी मुश्किलें होती हैं। सबसे अहम बात तो यह है कि नो एंट्री जोन में भी बड़े वाहन धड़ल्ले से आ जा रहे हैं। जब तक संबंधित विभागों के बीच तालमेल से काम नहीं होगा तब तक शहर को न तो अतिक्रमण से निजात मिलेगी न जाम सुलझेगा।
- जयदीप शहरवासी।
शहर के देवसर हांसी चौक से घंटाघर क्षेत्र में वाहनों का लंबा जाम लगता है। इसी तरह मुख्य मार्गों पर भी वाहन जाम में फंसे रहते हैं। जाम सुलझाने के लिए जो कर्मचारी हैं वे भी अपनी जगह से नहीं मिलते, जबकि दूर-दूर तक वाहन जाम में उलझे रहते हैं। कई लोग तो अपनी मनमर्जी से वाहन को मोड़ देते हैं, इससे भी रास्ता बंद हो जाता है। शहर में यातायात नियमों को सख्ती से लागू करने में सिर्फ चालान काटना ही जायज नहीं बल्कि ऐसे लोगों को वहां पर मौजूद कर्मचारी व्यवहारिक तौर वाहनों को व्यवस्थित कराकर भी कर सकते हैं।
-प्रवीण प्रेमनगर वासी।