भिवानी। लोहारू क्षेत्र के गांव फरटिया भीमा निवासी 22 वर्षीय दलित छात्रा दीक्षा आत्महत्या मामले की जांच में एक बार फिर अहम मोड़ सामने आया है। इस प्रकरण की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) को दिल्ली स्थित फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) से प्राप्त रिपोर्ट ने मामले को नई दिशा दे दी है।
एफएसएल रिपोर्ट के अनुसार, दीक्षा की कथित उत्तरपुस्तिकाओं में की गई लिखावट और उसकी वास्तविक हैंडराइटिंग का आपस में कोई मेल नहीं पाया गया है। इस खुलासे के बाद एसआईटी ने सिंघानी स्थित शारदा कॉलेज के निदेशक हनुमान और उसके बेटे राहुल के खिलाफ जालसाजी से जुड़ी धाराएं एफआईआर में जोड़ दी हैं। नई एफएसएल रिपोर्ट भिवानी न्यायालय में भी पेश कर दी गई है।
एसआईटी ने जांच के दौरान परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाएं और मृतका की हैंडराइटिंग के नमूने एफएसएल दिल्ली भेजे थे। पीड़ित परिवार के अधिवक्ता रजत कल्सन ने बताया कि एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद कॉलेज निदेशक और उसके बेटे की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है। कॉलेज प्रबंधन की ओर से पहले यह दावा किया गया था कि दीक्षा ने पांचवें सेमेस्टर की परीक्षा दी थी लेकिन अब लिखावट का मिलान न होना इस दावे को कमजोर करता है। इस मामले में अगली सुनवाई 9 जनवरी को होगी जिसमें पुलिस कोर्ट में फ्रेश स्टेटस रिपोर्ट भी पेश करेगी।
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि कॉलेज की बकाया फीस को लेकर दीक्षा पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था। फीस जमा न होने के कारण उसे पांचवें सेमेस्टर की परीक्षा में बैठने से रोका गया जिससे वह मानसिक तनाव में रहने लगी। परिजनों का यह भी आरोप है कि आरोपी राहुल उसे मानसिक रूप से परेशान किया जाता था। इसी कारण दिसंबर 2024 में दीक्षा ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। हालांकि कॉलेज प्रशासन इन सभी आरोपों से इन्कार करता रहा है।
प्राचार्य सहित चार लोगों के खिलाफ दर्ज किया था मामला :
मृतका के पिता जगदीश कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि वह मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं और आर्थिक तंगी के कारण समय पर कॉलेज फीस जमा नहीं कर सके। इसी वजह से उनकी बेटी को परीक्षा में बैठने से रोका गया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने कॉलेज प्राचार्य सहित चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। पहले जांच में आत्महत्या के लिए उकसाने के ठोस सबूत नहीं मिलने की बात कही गई थी लेकिन अब एफएसएल रिपोर्ट के बाद जांच को और गहराई से आगे बढ़ाया जा रहा है।