भिवानी। शहर में 21 अनधिकृत कॉलोनियां करीब 25 साल से अधिकृत होने का इंतजार कर रही हैं लेकिन टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्सटाइल एंड साइंसेज (टीआईटीएस) की करीब 20 एकड़ खाली जमीन महज 20 दिन में अधिकृत कर दी गई। ताकि इस जमीन की प्रॉपर्टी आईडी बनवाकर प्लॉट काटे जा सकें। ताज्जुब है कि परिषद ने खाली जमीन को पुराना बसा क्षेत्र दर्शाकर अधिकृत कराया है।
कृष्णा कॉलोनी, हनुमान ढाणी का पंचायती क्षेत्र, रेलवे स्टेशन के सामने का इलाका, घंटाघर क्षेत्र और 1975 से पहले बसे क्षेत्रों सहित 21 कॉलोनियों के बाशिंदे अपनी कॉलोनियों के अधिकृत होने का इंतजार कर रहे हैं। टीआईटीएस की जमीन करीब दो महीने पहले तक भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) पोर्टल पर अनधिकृत दिख रही थी लेकिन अब इसे अधिकृत दर्शाया गया है। तमाम आपत्तियां दूर किए जाने के बावजूद अनधिकृत कॉलोनियों के बाशिंदे प्रॉपर्टी आईडी बनवाने के लिए नगर परिषद के चक्कर काट रहे हैं। उन्हें जमीन की खरीद-बिक्री, भवनों के नक्शे मंजूर कराने, सीवर लाइन बिछाने और गलियां बनवाने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
खेल मैदान की 12 एकड़ जमीन पर पहले ही बस चुकी है कॉलोनी
टीआईटीएस के खेल मैदान की करीब 12 एकड़ जमीन पर पहले ही अवैध आवासीय कॉलोनी विकसित हो चुकी है। इस पर जिला नगर योजनाकार विभाग कई बार तोड़फोड़ की कार्रवाई कर चुका है। आरोप है कि भूमाफिया ने यहां प्लॉट काटे और अनधिकृत दायरे में प्रॉपर्टी आईडी भी बनवाई जा रही है। इसके ठीक पास टीआईटीएस की 20 एकड़ जमीन का नया पैच अधिकृत किया गया है। इससे प्रॉपर्टी आईडी बनवाना आसान हो गया है।
जमीन का नक्शा बाजार में, खरीद-बिक्री पर सवाल
टीआईटीएस की अधिकृत जमीन खाली होने के बावजूद उस पर खरीद-बिक्री और प्लॉटिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। संस्थान फिलहाल जमीन बेचने से इन्कार कर रहा है, लेकिन जमीन का नक्शा बाजार में उपलब्ध है। इसमें जमीन को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर दर्शाया गया है। नियमानुसार शिक्षण संस्थान इस जमीन को सीधे प्लॉट काटकर नहीं बेच सकता। ऐसा करने के लिए जिला नगर योजनाकार विभाग और नगर परिषद से अदेय प्रमाणपत्र (एनडीसी) लेना होगा।
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प्लॉट काटे तो कार्रवाई की जाएगी
जमीन टीआईटीएस शिक्षण संस्थान की है, जो लंबे समय से अनधिकृत दर्शाई जा रही थी। संस्थान की ओर से प्रस्ताव आया था, जिसे मुख्यालय भेजा गया। वहां से अधिकृत करने की मंजूरी दे दी गई। जमीन के ज्यादातर हिस्से पर कोई निर्माण नहीं है और यह संस्थान की ही है। बिना एनडीसी के जमीन पर निर्माण या प्लॉट काटने की कोशिश की जाती है, तो कार्रवाई की जाएगी। - हरबीर सिंह, जिला नगर आयुक्त, नगर परिषद भिवानी
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जमीन का नए भवन बनाने में होगा इस्तेमाल
टीआईटीएस का कैंपस 100 साल पुराना हो चुका है। इसलिए नए भवन बनाए जाने हैं। नक्शा भी तैयार हो चुका है। जमीन शिक्षण संस्थान की है और इसका इस्तेमाल नई ढांचागत सुविधाएं विकसित करने में किया जा रहा है। इसमें से कोई जमीन नहीं बेची गई है।
- प्रो. बीके बेहरा, निदेशक, टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्सटाइल एंड साइंसेज (टीआईटीएस), भिवानी