तोशाम। भगवान शिव के भक्तों के लिए सावन का महीना विशेष फलदायी रहेगा। सावन की शुरुआत 22 जुलाई को और समापन 19 अगस्त को होगा। इन दोनों दिन सोमवार होगा जो ग्रह, नक्षत्रों का खास संयोग बन रहा है।
पंडित श्रीकांत शास्त्री ने बताया कि पांच सोमवार के साथ सावन के अंतिम दिन रक्षाबंधन होगा। इसके साथ ही सावन के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 21 जुलाई रविवार को दोपहर 3:46 बजे से शुरू होगी। उदयातिथि को देखते हुए 22 जुलाई से सावन शुरू होगा। उन्होंने बताया कि विशेष योगों के समावेश में इस पूरे मास में प्रीति योग और सावन नक्षत्र का समावेश रहेगा। इन शुभ योगों में भगवान शिव की पूजा-अर्चना और अभिषेक करने से भक्तों पर उनकी विशेष कृपा बरसेगी।
पांच सोमवार का महत्व
श्रीकांत शास्त्री ने बताया कि सावन में पांच सोमवार का होना एक दुर्लभ घटना है। इस दौरान भक्त भगवान शिव की पूजा-अर्चना, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक आदि अनुष्ठानों का आयोजन करते हैं। पांच सोमवार मिलने से भक्तों को भगवान शिव की आराधना का एक अतिरिक्त दिन मिल जाएगा, जिससे वे अपनी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए प्रार्थना कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि सावन में अमूमन तीन मंगलवार पड़ते हैं, लेकिन इस बार चार मंगलवार पड़ेंगे। इन दिनों श्रद्धालु मां मंगला गौरी का व्रत रखते हैं। पांच सोमवार, दुर्लभ योगों और मंगला गौरी व्रत के चार दिनों के साथ, यह सावन मास भक्तों के लिए विशेष रूप से फलदायी रहने वाला है। भगवान शिव की आराधना और व्रत-अनुष्ठानों के माध्यम से भक्त अपनी मनोकामनाएं पूरी करने और भगवान की कृपा प्राप्त करने का अवसर प्राप्त कर सकेंगे।