भिवानी। धुंध और अंधेरे में कुत्तों और बंदरों का उत्पात लगातार बढ़ता जा रहा है। सुबह के समय बंदर सैर पर निकलने वाले लोगों और स्कूल जाने वाले बच्चों को निशाना बना रहे हैं, जबकि आवारा कुत्ते भी राह चलते लोगों पर हमला कर रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज रोधी टीका (एआरवी) लगवाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
वीरवार को पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज में अवकाश होने के कारण जिला नागरिक अस्पताल के आपात विभाग में बड़ी संख्या में लोग रेबीज रोधी टीका लगवाने पहुंचे। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, प्रतिदिन औसतन 35 से 40 मरीज कुत्तों या बंदरों के काटने के बाद टीकाकरण के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं।
लोगों का कहना है कि बंदर सुबह के समय अचानक आक्रामक हो जाते हैं जबकि कुत्ते धुंध के कारण दिखाई नहीं देते और नजदीक आते ही हमला कर देते हैं। नेहरू पार्क, बस स्टैंड और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर कुत्तों व बंदरों के झुंड लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं।
केस एक :
बुधवार रात दस बजे के करीब बवानीखेड़ा रेलवे स्टेशन से घर पर जा रहा था। अंधेरे में सड़क के बीच में सो रहा कुत्ता दिखाई नहीं दिया। पैर उससे टकरा गया। कुत्ते ने अचानक से अपने बचाव में अपने दांतों से पैर को काट लिया। इसके बाद रेबीज रोधी टीका लगवाने के लिए आया हूं।
-बिजेंद्र कुमार, बवानीखेड़ा
केस दो
वीरवार सुबह पूजन के लिए मंदिर में गई थी। पूजा के सामान के साथ प्लेट में केला था। बंदरों ने केला छीनने के प्रयास में पीछे से अचानक हाथ को काट दिया। आसपास के लोगों ने बंदरों को भगा कर बचाया।
प्रमिला, भिवानी
इन इलाकों में है ज्यादा समस्या
शहर और कस्बों में कई ऐसे स्थान सामने आए हैं, जहां बंदरों और कुत्तों का खतरा अधिक है। इनमें नागरिक अस्पताल, नेहरू पार्क, बस स्टैंड, चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय परिसर, राजीव गांधी महाविद्यालय, साईं प्रशिक्षण केंद्र दिनोद गेट, हनुमान ढाणी और बवानीखेड़ा कस्बे की एचएसवीपी कॉलोनी, बड़ा गौरवा, पुर रोड, गोशाला, पुलिस थाना, तहसील कार्यालय, भिवानी रोड, हांसी रोड, जमालपुर रोड, सांवरमल ढाणी, गुलाब सिंह पार्क और कमाल मंदिर क्षेत्र शामिल हैं।
यह उपाय अपनाएं :
चिकित्सकों का कहना है कि कुत्ते या बंदर के काटने पर घाव को तुरंत साबुन और साफ पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोना चाहिए। टांके नहीं लगाने चाहिए और 24 घंटे के भीतर एंटी रेबीज टीका जरूर लगवाना चाहिए।
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जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में एआरवी टीका उपलब्ध है। ओपीडी बंद होने की स्थिति में भी आपात विभाग में टीकाकरण की सुविधा दी जा रही है। डॉ. रघुबीर शांडिल्य, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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शहर में कुत्तों और बंदरों के टीकाकरण व नसबंदी का कार्य शुरू कर दिया गया है। कुछ स्थानों से पशुओं को पकड़ा भी गया है और अगले सप्ताह से बेसहारा पशुओं को पकड़ने का विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिससे लोगों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। -भवानी प्रताप, चेयरपर्सन प्रतिनिधि, नगर परिषद